नई दिल्ली में **7 से 10 अक्टूबर** तक आयोजित होने जा रहे इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 का फोकस अब AI-नेटिव इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होगा। टेलिकॉम कंपनियां अब 5G हार्डवेयर से आगे बढ़कर AI का इस्तेमाल कर अपना खर्च घटाने और नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की तैयारी में हैं।
5G से AI-नेटिव की ओर बदलाव
आगामी इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026, जो नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगी, टेलिकॉम कंपनियों की निवेश रणनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी। अब तक कंपनियां सिर्फ 5G कवरेज बढ़ाने पर जोर दे रही थीं, लेकिन अब फोकस AI-नेटिव इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट हो रहा है। इसका असर आने वाले समय में Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी बड़ी कंपनियों के नेटवर्क मैनेजमेंट और उनके ऑपरेटिंग खर्च पर पड़ सकता है।
AI का असली फायदा क्या है?
पारंपरिक रूप से टेलिकॉम ऑपरेटर हार्डवेयर पर काफी खर्च करते हैं, लेकिन अब नेटवर्क को 'AI-कोर' के साथ डिजाइन किया जा रहा है। इसका लक्ष्य नेटवर्क मैनेजमेंट को पूरी तरह ऑटोमेट करना है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप के बिना फॉल्ट का पता लगाना और कैपेसिटी को एडजस्ट करना आसान हो जाएगा। निवेशकों के लिए इसका मतलब है—ऑपरेटिंग खर्च (OPEX) में कमी और ऊर्जा की बचत।
AI-RAN और सॉवरेन AI की भूमिका
इस इवेंट में AI-RAN (Artificial Intelligence Radio Access Network) एक अहम विषय होगा। इसके जरिए कंपनियां रियल-टाइम में डेटा ट्रैफिक को ऑप्टिमाइज़ कर सकेंगी, जिससे मौजूदा 5G नेटवर्क की परफॉरमेंस और बेहतर होगी। इसके अलावा, 'सॉवरेन AI' पर भी चर्चा होगी। डेटा लोकलाइजेशन और सिक्योरिटी से जुड़े कड़े नियमों के बीच कंपनियों को ग्लोबल क्लाउड आर्किटेक्चर और भारतीय कानूनों के बीच संतुलन बनाना होगा, जिसका असर उनकी कंप्लायंस लागत पर भी पड़ेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
टेलिकॉम सेक्टर पहले से ही कर्ज और भारी निवेश के बोझ तले दबा है। हालांकि AI-ड्रिवन नेटवर्क दक्षता बढ़ाने का रास्ता है, लेकिन इसमें 'एग्जीक्यूशन रिस्क' (Execution Risk) भी शामिल है। नई टेक्नोलॉजी को लागू करने में अनचाहा खर्च या देरी हो सकती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां इन टूल्स को कैसे फंड करती हैं और क्या ये वाकई ऑपरेशन्स में मेजरेबल बचत ला पाती हैं।
