भारत में साल 2026 की शुरुआत में मोबाइल सुरक्षा से जुड़ी **18,187** घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा हैं। थ्रेट डेंसिटी में **49%** की भारी बढ़ोतरी के साथ, अब साइबर हमले और भी सटीक और घातक हो गए हैं।
भारत अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में मोबाइल साइबर हमलों का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। साइबर सुरक्षा फर्म Kaspersky की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में 18,187 दुर्भावनापूर्ण घटनाएं सामने आईं। हालांकि हमलों की कुल संख्या में मामूली कमी आई है, लेकिन इनकी तीव्रता में 49% की बढ़ोतरी चिंता का विषय है। अब हैकर्स बड़े पैमाने पर हमले करने के बजाय चुनिंदा लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं।
AI का खतरनाक इस्तेमाल
हैकर्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर सुरक्षा प्रणालियों को चकमा दे रहे हैं। नकली जॉब ऑफर्स और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाया जा रहा है। Rewardsteal और Thamera जैसे ट्रोजन (Trojans) का इस्तेमाल कर डिवाइस को हाईजैक किया जा रहा है, जिससे सामान्य यूजर्स के लिए असली और नकली ऐप के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है।
कंपनियों के बजट पर दबाव
निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। अब बैंकिंग, रिटेल और डिजिटल पेमेंट जैसी कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा को नजरअंदाज करना नामुमकिन हो गया है। कंपनियों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी-भरकम पूंजी खर्च करनी पड़ रही है। हालांकि, यह खर्च ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) पर अस्थायी दबाव डाल सकता है, लेकिन डेटा चोरी और कानूनी जोखिमों से बचने के लिए यह एक अनिवार्य निवेश बन गया है।
भविष्य का निवेश
साइबर सुरक्षा का बढ़ता खतरा उन IT कंपनियों और सिक्योरिटी फर्मों के लिए एक बड़े अवसर की तरह है जो सुरक्षा समाधान प्रदान करती हैं। आने वाले समय में, जो कंपनियां अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत रखेंगी, वही ग्राहकों का भरोसा जीतने में कामयाब होंगी। निवेशकों को सलाह है कि अगली तिमाही के अर्निंग कॉल्स (Earnings Calls) में कंपनियों के 'साइबर सिक्योरिटी बजट' पर मैनेजमेंट की टिप्पणी पर जरूर नजर रखें।
