सेमीकंडक्टर 2.0: भारत का ₹1.27 लाख करोड़ का दांव, AI चिप डिजाइन में क्रांति की तैयारी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
सेमीकंडक्टर 2.0: भारत का ₹1.27 लाख करोड़ का दांव, AI चिप डिजाइन में क्रांति की तैयारी!

भारत सरकार ने AI चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की 'सेमीकॉन 2.0' पहल लॉन्च की है। यह नई योजना प्राइवेट वेंचर कैपिटलिस्ट्स के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि पिछली डिजाइन-लिंक्ड इंसेटिव (DLI) स्कीम की फंडिग की कमी को दूर किया जा सके। अगले छह सालों में AI और हाई-एंड टेक्नोलॉजी के लिए घरेलू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) बनाने पर इसका खास फोकस रहेगा।

एडवांस चिप डिजाइन के लिए फंडिग में बड़ा इजाफा

भारतीय सरकार ने 'सेमीकॉन 2.0' पहल की घोषणा की है, जो देश को सेमीकंडक्टर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) और चिप डिजाइन का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस योजना के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट तय किया गया है और यह फाइनेंशियल ईयर 2026-27 से अगले छह सालों तक चलेगी। यह कदम मौजूदा डिजाइन-लिंक्ड इंसेटिव (DLI) स्कीम से आगे बढ़कर है, क्योंकि सरकार का मानना है कि DLI स्कीम हाई-एंड चिप डेवलपमेंट के लिए पर्याप्त नहीं है।

महंगी चिप्स के लिए नया को-इन्वेस्टमेंट मॉडल

मौजूदा DLI फ्रेमवर्क के तहत, चिप डिजाइन फर्मों को प्रति प्रोजेक्ट करीब ₹15 करोड़ तक की सरकारी सहायता मिलती है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य एडवांस्ड एप्लीकेशन्स के लिए अत्याधुनिक चिप्स बनाने में ₹1,000 करोड़ से भी ज्यादा का खर्च आ सकता है। इस फंडिग गैप को भरने के लिए, सेमीकॉन 2.0 में सरकार प्राइवेट वेंचर कैपिटलिस्ट्स और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ मिलकर पैसा लगाएगी। इस मॉडल में, प्रोफेशनल इन्वेस्टर्स स्टार्टअप्स का चुनाव और उनकी जांच करेंगे, जबकि सरकार बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी फंडिग मुहैया कराएगी।

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) पर खास फोकस

सेमीकॉन 2.0 का मुख्य लक्ष्य स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) का निर्माण करना है। भारत में पहले से ही 100 से ज्यादा चिप डेवलपमेंट स्टार्टअप्स हैं, लेकिन उनमें से कई छोटे और कम जटिल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। सरकार ग्रांट्स, इक्विटी और रॉयल्टी-लिंक्ड पेमेंट्स जैसे इंसेंटिव्स देकर, बिना किसी सख्त पर-कंपनी इन्वेस्टमेंट कैप के, फर्मों को और अधिक जटिल डिजाइन प्रोजेक्ट्स हाथ में लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

यह पहल डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से अलग करती है। भले ही लोकल चिप मैन्युफैक्चरिंग एक लॉन्ग-टर्म गोल है, लेकिन सरकार पहले डिजाइन इकोसिस्टम को प्राथमिकता दे रही है ताकि ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में भारत की मौजूदगी मजबूत हो सके। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इस प्रोग्राम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू फर्में कितने सफलतापूर्वक जटिल डिजाइन प्रोजेक्ट्स को पूरा कर पाती हैं और प्राइवेट वेंचर कैपिटल सेक्टर को-इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क में कितना हिस्सा लेता है। आने वाले कुछ सालों में फंड का वास्तविक आवंटन, स्वीकृत बड़े डिजाइन प्रोजेक्ट्स की संख्या और ग्लोबल मार्केट में कमर्शियलाइज होने वाली सस्टेनेबल सेमीकंडक्टर IP के निर्माण की प्रगति प्रमुख मॉनिटर करने वाले बिंदु होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.