सरकार ने ₹1,27,500 करोड़ के बजट के साथ 'Semicon 2.0' का आगाज़ किया है। इस नए रोडमैप का मकसद सिर्फ चिप बनाना ही नहीं, बल्कि चिप डिजाइनिंग से लेकर पैकेजिंग तक एक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है।
वैल्यू चेन पर सरकार का फोकस
Ministry of Electronics and Information Technology ने Semicon 2.0 फ्रेमवर्क को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) इस पूरे प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगी। अब फोकस केवल फैब्रिकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट, एडवांस मटेरियल, और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे 6 प्रमुख पिलर्स शामिल किए गए हैं।
कंपनियों के लिए क्या है खास?
भारी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने बड़े इंसेंटिव्स का ऐलान किया है:
- सिलिकॉन वेफर फैब्रिकेशन: कैपिटल स्पेंडिंग पर 40% तक की सहायता मिलेगी।
- एडवांस पैकेजिंग (2.5D/3D): पात्र खर्च का 35% सरकार कवर करेगी।
- लेगेसी पैकेजिंग: इसमें 25% का सपोर्ट मिलेगा।
ये इंसेंटिव्स प्रोजेक्ट की प्रगति के आधार पर जारी किए जाएंगे, जिसका ऑपरेशनल विंडो 6 साल का रखा गया है।
क्या हैं चुनौतियां?
निवेशकों के लिए इस सेक्टर में कुछ जोखिम भी हैं। सेमीकंडक्टर प्लांट्स लगाने में बेहद ऊंचा शुरुआती खर्च आता है और इनका जेस्टेशन पीरियड काफी लंबा होता है। साथ ही, ग्लोबल लेवल पर टैलेंट की कमी और तकनीकी जटिलताएं बड़ा अड़चन हैं। आने वाले समय में प्रोजेक्ट का निष्पादन और ग्लोबल पार्टनर्स के साथ जुड़ाव ही इस मिशन की सफलता तय करेगा।
