Starlink License: भारत में Starlink की राह मुश्किल, सुरक्षा जांच के चलते लाइसेंस पेंडिंग

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Starlink License: भारत में Starlink की राह मुश्किल, सुरक्षा जांच के चलते लाइसेंस पेंडिंग

भारत सरकार ने SpaceX के Starlink को लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। नेशनल सिक्योरिटी और सॉवरेन्टी को प्राथमिकता देते हुए सरकार फिलहाल फूँक-फूँक कर कदम उठा रही है।

सुरक्षा और संप्रभुता पर सरकार का जोर

भारत सरकार विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क को लेकर बेहद सतर्क है। सरकार का मुख्य फोकस क्रिटिकल कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और डेटा सिक्योरिटी पर है। अधिकारियों का मानना है कि सैटेलाइट सेवाओं में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या सर्विस में रुकावट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है। यही कारण है कि भारतीय रेगुलेटर्स अब कंपनियों से सख्त एक्सेस कंट्रोल और पारदर्शी प्रोटोकॉल की मांग कर रहे हैं।

कंपनियों के बीच रस्साकशी

इस मामले में एक बड़ा पेंच घरेलू टेलिकॉम दिग्गजों और ग्लोबल सैटेलाइट कंपनियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा का भी है। Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां लंबे समय से 'लेवल प्लेइंग फील्ड' की मांग कर रही हैं। इनका तर्क है कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को उन्हीं रेगुलेटरी और फाइनेंशियल बोझ का सामना करना चाहिए, जो फाइबर और मोबाइल टावर जैसे ट्रेडिशनल नेटवर्क पर लागू होते हैं। स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर भी बहस जारी है—जहाँ वैश्विक कंपनियां प्रशासनिक आवंटन की वकालत कर रही हैं, वहीं भारतीय टेलिकॉम कंपनियां पारदर्शी नीलामी पर जोर दे रही हैं।

स्पेक्ट्रम पॉलिसी और आर्थिक असर

इन्वेस्टर्स की नजर अब सरकार की आने वाली पॉलिसी पर टिकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज को कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का लगभग 5% रखने पर विचार कर रही है। कैबिनेट की अंतिम मंजूरी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड मार्केट में नई कंपनियों की एंट्री कितनी तेजी से हो पाएगी। तब तक, यह पूरा सेक्टर एक 'वेटिंग पीरियड' में रहने वाला है।

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