FY26 में भारत के सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में **8.2%** की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कोर IT और इंजीनियरिंग सर्विसेज के दम पर यह आंकड़ा **$221.4 बिलियन** पर पहुंच गया है, हालांकि सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट सेगमेंट में थोड़ी गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का IT एक्सपोर्ट सेक्टर वित्त वर्ष 2026 में $221.4 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल $204.7 बिलियन था। 8.2% की यह सालाना ग्रोथ भारतीय टेक कंपनियों की मजबूत सेहत को दर्शाती है।
इंजीनियरिंग और IT सर्विसेज में तेजी
आईटी सर्विसेज का दबदबा बरकरार है, जो कुल एक्सपोर्ट का 66.4% हिस्सा है और इसमें 12% की बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, इंजीनियरिंग सर्विसेज में 11% का इजाफा हुआ है। भारतीय कंपनियां अब हाई-वैल्यू काम जैसे प्रोडक्ट डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर तेजी से शिफ्ट हो रही हैं, जो अब कुल एक्सपोर्ट मिक्स का 4.3% हो गया है। इसके अलावा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और एंबेडेड सिस्टम्स का एक्सपोर्ट शेयर बढ़कर 3% हो गया है, जो पारंपरिक IT बजट में कटौती के दौर में एक बड़ा सहारा बना है।
रिस्क और मार्केट का गणित
निवेशकों को सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेगमेंट पर नजर रखनी चाहिए, जिसका हिस्सा 3.3% से घटकर 2.9% रह गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते असर के कारण सॉफ्टवेयर डिलीवरी के तौर-तरीके बदल रहे हैं, जिसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता की है। भारत के कुल सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट का 54.1% यानी $119.7 बिलियन केवल अमेरिका से आता है। अगर अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सुस्ती आती है या वहां टेक्नोलॉजी स्पेंडिंग घटती है, तो भारतीय IT कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ना तय है। यूरोप में भी ग्रोथ स्थिर है, लेकिन कुल एक्सपोर्ट में वहां की हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है।
