Pronto पर भारत में डेटा प्राइवेसी की जांच, AI ट्रेनिंग डेटा पर उठे सवाल

TECHNOLOGY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Pronto पर भारत में डेटा प्राइवेसी की जांच, AI ट्रेनिंग डेटा पर उठे सवाल
Overview

होम-सर्विस प्लेटफॉर्म Pronto अब भारतीय अथॉरिटीज के निशाने पर है। कंपनी पर AI ट्रेनिंग के लिए डेटा इकट्ठा करने के तरीकों को लेकर जांच चल रही है, जो डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन कर सकता है। अगर यह पाया गया कि कंपनी ने ग्राहक डेटा को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए स्पष्ट सहमति नहीं ली थी, तो उसे भारी जुर्माने और अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

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सहमति का पेंच

असली मुद्दा यह है कि सेवा देने के लिए इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल AI ट्रेनिंग के लिए किया जा रहा है। Pronto के पास सर्विस बुकिंग के लिए सामान्य यूजर एग्रीमेंट हैं, लेकिन इस डेटा को AI ट्रेनिंग में डालने के लिए स्पष्ट सहमति के बिना इस्तेमाल करना डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (Digital Personal Data Protection Act) के खिलाफ है। जानकारों का मानना ​​है कि स्टार्टअप के लिए सहमति के मौजूदा नियम काफी पुराने हैं और वीडियो व ऑडियो जैसे संवेदनशील डेटा के AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए सेकेंडरी इस्तेमाल को कवर नहीं करते। इस अस्पष्टता का मतलब है कि ग्राहक अनजाने में कॉर्पोरेट रिसर्च में मदद कर रहे हैं।

मार्केट पोजीशन पर खतरा

भारत के होम-सर्विस सेक्टर में Pronto की स्थिति को लेकर उसके कॉम्पिटिटर्स प्रतिक्रिया दे रहे हैं। डेटा के प्रति जागरूक ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए Urban Company जैसी कंपनियों ने प्राइवेसी पर जोर दिया है। यह Pronto के तरीके के विपरीत है, जो बुनियादी सुरक्षा के बजाय तेजी से AI डेवलपमेंट को प्राथमिकता देता है। निवेशकों के लिए, अगर कंपनी अपने डेटा प्रैक्टिसेस को सुरक्षित नहीं कर पाती है, तो रेगुलेटरी जुर्माने और कानूनी चुनौतियों की लागत AI-फर्स्ट मॉडल के फायदों से कहीं ज़्यादा हो सकती है।

Pronto के लिए रेगुलेटरी रिस्क

डेटा को लेकर भारत का रेगुलेटरी रवैया सख्त होता जा रहा है। अगर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) यह फैसला सुनाता है कि Pronto को AI ट्रेनिंग के लिए डेटा के हर इस्तेमाल के लिए स्पष्ट सहमति की आवश्यकता होगी, तो उसके मौजूदा AI मॉडल बेकार हो सकते हैं। मौजूदा एजेंसियां ​​किसी खास AI रेगुलेटर के न होने पर भी व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए प्राइवेसी कानूनों की व्याख्या कर सकती हैं। अगर Pronto को अपने इंटरनल डेटा का उपयोग करने से रोका जाता है, तो उसे अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने और उन कंपनियों के साथ कॉम्पिटिशन करने में संघर्ष करना पड़ेगा जिनके पास क्लीनर डेटा सोर्स हैं।

भविष्य के इंडस्ट्री ट्रेंड्स

ग्राहक व्यवहार डेटा का उपयोग करने वाले स्टार्टअप्स को भविष्य में और सख्त पारदर्शिता नियमों का सामना करना पड़ सकता है। रेगुलेटरी दबाव और बढ़ते यूजर एक्विजिशन कॉस्ट के कारण Pronto के डेटा गवर्नेंस प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। एनोनिमाइज्ड (anonymized) या पूरी तरह से पारदर्शी डेटा सिस्टम में बदलाव किए बिना, कंपनी को ऑपरेशनल सस्पेंशन का खतरा है। निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या Pronto सरकारी जांच के नतीजे आने और भारत में AI डेवलपमेंट के लिए एक मानक तय होने से पहले प्राइवेसी-फर्स्ट एप्रोच अपना सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.