India Electronics Output: ₹9.6 लाख करोड़ का आंकड़ा पार, अब पार्ट्स बनाने पर फोकस!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Electronics Output: ₹9.6 लाख करोड़ का आंकड़ा पार, अब पार्ट्स बनाने पर फोकस!

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन फाइनेंशियल ईयर 2026 में **$116 बिलियन** (लगभग ₹9.6 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है। एक्सपोर्ट (Export) भी **$48 बिलियन** तक पहुंच गया है। सरकार अब फिनिश्ड प्रोडक्ट्स (finished products) की असेंबली से आगे बढ़कर जरूरी पुर्जों के लिए एक घरेलू सप्लाई चेन (supply chain) बनाने पर जोर दे रही है। निवेशक इस कदम पर पैनी नजर रखे हुए हैं कि यह कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग (component manufacturing) की ओर बढ़ाए गए कदम, **₹69,000 करोड़** से ज्यादा के निवेश के साथ, कैसे प्रॉफिट मार्जिन (profit margins) को बेहतर बना सकते हैं और महंगे इम्पोर्ट (imports) पर निर्भरता कम कर सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ा मुकाम हासिल

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) सेक्टर ने एक बड़ा मील का पत्थर छुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कुल प्रोडक्शन $116 बिलियन (लगभग ₹9.6 लाख करोड़) को पार कर गया है। इस सेक्टर से होने वाला एक्सपोर्ट (Export) भी बढ़कर $48 बिलियन हो गया है। यह ग्रोथ रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, क्योंकि अब फोकस मोबाइल फोन जैसे तैयार प्रोडक्ट्स की सिर्फ असेंबली (assembly) करने से हटकर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स (components) और मटीरियल (material) के लिए एक मजबूत, घरेलू सप्लाई चेन (domestic supply chain) बनाने पर आ गया है।

पुर्जों के निर्माण पर नया जोर

सालों से, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की कहानी फाइनल असेंबली (final assembly) से चल रही थी, जिसमें अक्सर कम प्रॉफिट मार्जिन (profit margins) और इम्पोर्टेड पार्ट्स (imported parts) पर भारी निर्भरता शामिल थी। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) द्वारा समर्थित मौजूदा दौर, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCBs), एन्क्लोजर (enclosures), स्पीकर (speakers) और एंटीना (antennas) जैसी चीजों के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देकर इसे बदलने का लक्ष्य रखता है। इन पार्ट्स को भारत में बनाकर, कंपनियां ज्यादा वैल्यू कैप्चर कर सकती हैं और जरूरी मटीरियल इम्पोर्ट करने से जुड़े लागत (cost) और जोखिम (risk) को कम कर सकती हैं।

निवेश में दिख रहा बदलाव

निवेश गतिविधियां (Investment activity) इस बदलाव को दर्शा रही हैं। ECMS ने ₹69,000 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट (project investments) को आकर्षित किया है, जो कि शुरुआती टारगेट ₹59,000 करोड़ से काफी बेहतर प्रदर्शन है। इस स्कीम के तहत 106 अप्रूव्ड प्रोजेक्ट्स हैं, और उनकी प्रगति सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण मॉनिटर करने योग्य (monitorable) चीज है। अगस्त 2026 तक, इनमें से 38 प्रोजेक्ट्स ने मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी है, जबकि 16 प्रोजेक्ट्स अभी कंस्ट्रक्शन (construction) या इंस्टॉलेशन (installation) फेज में हैं।

चुनौतियां और भविष्य की राह

इस प्रगति के बावजूद, सेक्टर को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां भारत ने इलेक्ट्रॉनिक एन्क्लोजर (electronic enclosures) जैसे सरल क्षेत्रों में लगभग आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, वहीं हाई-एंड रॉ मटीरियल (high-end raw materials) के लिए अभी भी वैश्विक सप्लायर्स (global suppliers) पर बहुत ज्यादा निर्भर है। सच्ची प्रतिस्पर्धात्मकता (competitiveness) हासिल करने के लिए न केवल फैक्ट्री क्षमता (factory capacity) की जरूरत है, बल्कि रिसर्च (research), डिजाइन (design) और हाई-क्वालिटी टेस्टिंग स्टैंडर्ड्स (high-quality testing standards) में भी निवेश की आवश्यकता है। इस स्पेस में निवेशक उन 16 प्रोजेक्ट्स की ऑपरेशनल टाइमलाइन (operational timeline) को ट्रैक करें जो वर्तमान में कंस्ट्रक्शन (construction) के अधीन हैं, क्योंकि उनकी सफलता यह तय करेगी कि भारत कितनी जल्दी इम्पोर्ट (imports) को डोमेस्टिक सप्लाई (domestic supplies) से बदल सकता है।

इसके अलावा, यह सेक्टर ग्लोबल डिमांड (global demand) और स्थापित मैन्युफैक्चरिंग हब (manufacturing hubs) से कड़ी प्रतिस्पर्धा के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स (manufacturers) लगातार अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (international quality standards) को कम लागत पर पूरा करने में सक्षम हों। जैसे-जैसे इकोसिस्टम (ecosystem) परिपक्व होगा, कंपनियों की वैल्यू चेन (value chain) में ऊपर चढ़ने की क्षमता - बेसिक असेंबली (basic assembly) से लेकर प्रिसिजन कंपोनेंट्स (precision components) के कॉम्प्लेक्स मैन्युफैक्चरिंग (complex manufacturing) तक - लॉन्ग-टर्म ग्रोथ (long-term growth) और मार्जिन स्टेबिलिटी (margin stability) के लिए महत्वपूर्ण कारक साबित होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.