भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार देने के लिए बड़े रेगुलेटरी रिफॉर्म्स का ऐलान किया है। इसमें AI-पावर्ड कार्गो स्कैनिंग और सेंट्रलाइज्ड अप्रूवल रोडमैप जैसे कदम शामिल हैं, जो कंपनियों के खर्च को घटाएंगे और काम में तेजी लाएंगे।
Semicon India 2026 कॉन्फ्रेंस में सरकार ने हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के सामने आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर में प्रोजेक्ट की देरी का सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है, जिसे ध्यान में रखते हुए कस्टम क्लीयरेंस और अनुपालन (Compliance) प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है।
लॉजिस्टिक्स में आएगी तेजी
सरकार अब एडवांस्ड बिल ऑफ एंट्री फाइलिंग पर जोर दे रही है। फिलहाल लगभग 85% इंपोर्ट कार्गो बिना फिजिकल जांच के निकल जाता है, और भरोसेमंद पार्टनर्स के लिए यह आंकड़ा 99% है। अगले 2 साल में सरकार AI-इनेबल्ड कंटेनर स्कैनिंग सिस्टम लागू करेगी, जिससे लॉजिस्टिकल रुकावटें कम होंगी और कंपनियों की इन्वेंट्री कॉस्ट में भारी कमी आएगी।
सरकारी कामकाज का सेंट्रलाइज्ड रोडमैप
DPIIT एक सेंट्रलाइज्ड मैपिंग सिस्टम विकसित कर रहा है ताकि अलग-अलग सरकारी विभागों से मिलने वाली मंजूरियों में एकरूपता आए। इससे प्रोजेक्ट्स को मिलने वाली अप्रूवल में स्पष्टता आएगी और कंपनियों को अपने कैश फ्लो और कैपिटल स्पेंडिंग को बेहतर तरीके से प्लान करने में मदद मिलेगी।
SEZ नियमों में राहत
स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) के ढांचे में लैंड एलोकेशन, डोमेस्टिक सेल्स प्रोविजन्स और विदेशी मुद्रा कैलकुलेशन को लेकर बदलाव किए गए हैं। धोलेरा, गुजरात जैसे इंडस्ट्रियल हब्स में इन सुधारों का असर दिखना शुरू हो गया है, जहां Kaynes Semicon जैसी कंपनियां लाइसेंसिंग प्रक्रिया में आ रही आसानी का फायदा उठा रही हैं।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल रेगुलेटरी आसानी ही काफी नहीं है। ग्लोबल हब के मुकाबले खड़े होने के लिए स्टेबल सप्लाई चेन, बिजली और पानी की निरंतर उपलब्धता जैसे फैक्टर भी निर्णायक होंगे। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Tata Electronics और Micron जैसे बड़े प्लेयर्स के प्लांट्स कितनी जल्दी चालू हो पाते हैं और लोकल सप्लाई चेन कितनी तेजी से विकसित होती है।
