Data Center Policy: आम लोगों का बिजली बिल बचाने के लिए सरकार सख्त, नए नियमों की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Data Center Policy: आम लोगों का बिजली बिल बचाने के लिए सरकार सख्त, नए नियमों की तैयारी

भारतीय सरकार डेटा सेंटर इंडस्ट्री के लिए एक नई पॉलिसी ला रही है, ताकि इनका भारी बिजली खर्च घरों के बिल पर बोझ न बने। 2030 तक इस सेक्टर में होने वाले बड़े विस्तार के बीच, यह कदम डेवलपर्स के लिए नए अनुपालन और ऑपरेशनल रिस्क बढ़ा सकता है।

बिजली की बढ़ती मांग और सरकार की चिंता

IT राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 14 अक्टूबर, 2026 को पुष्टि की है कि सरकार एक डेडिकेटेड नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक और हाई-स्केल डेटा सेंटर्स की बिजली की भारी खपत, घरेलू बिजली सप्लाई को प्रभावित न करे और आम जनता के बिलों में इजाफा न हो।

डिजिटल ग्रोथ बनाम ग्रिड स्थिरता

भारत खुद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। अनुमानों के अनुसार, देश की डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा 1.8-2.1 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 5.6 से 9.6 गीगावाट के बीच होने का लक्ष्य है। हालांकि यह मल्टी-बिलियन डॉलर का अवसर है, लेकिन यह स्थानीय पावर और वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव डाल रहा है। नई पॉलिसी का लक्ष्य इस असंगठित सेक्टर में स्टैंडर्ड्स को सेंट्रलाइज करना है।

ऑपरेशन्स पर क्या होगा असर?

मुंबई और विशाखापत्तनम जैसे प्रमुख केंद्रों में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर स्थानीय विरोध बढ़ रहा है। लोग पानी के अधिक इस्तेमाल और बिजली ग्रिड पर दबाव को लेकर चिंतित हैं। इस सरकारी कदम के बाद, अगर कठोर ग्रिड लोड नियम या अनिवार्य ग्रीन एनर्जी कोटा लागू होता है, तो ऑपरेटरों का खर्च बढ़ सकता है। निवेशकों के लिए अब 'ग्रोथ-एट-एनी-कॉस्ट' का मॉडल पुराना हो चुका है और अब स्थिरता (Sustainability) ही मुख्य प्राथमिकता होगी।

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