भारत की साइबर क्राइम एजेंसी ने Google को अपने Firebase प्लेटफॉर्म पर मौजूद सैकड़ों ऐसे अकाउंट्स को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है, जो फिशिंग और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े थे। यह आदेश तकनीकी प्लेटफॉर्म्स की कानूनी ज़िम्मेदारी को रेखांकित करता है, खासकर जब साइबर फ्रॉड से भारी नुकसान हो रहा है।
Google के Firebase पर बड़ी कार्रवाई
भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने Google को एक बड़ा निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि उनके Firebase प्लेटफॉर्म पर चल रहे सैकड़ों ऐसे अकाउंट्स को फौरन हटाया जाए, जिनका इस्तेमाल आपराधिक गिरोह कर रहे थे। जांच में पाया गया कि इन अकाउंट्स का उपयोग फिशिंग वेबसाइटें चलाने और एंड्रॉइड मैलवेयर फैलाने के लिए हो रहा था।
कैसे हो रहा था फ्रॉड?
ये अपराधी बड़ी वित्तीय संस्थाओं का रूप धारण कर लोगों को धोखा दे रहे थे। Firebase जैसे प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने की वजह थी इसकी मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्री सर्विस का लाभ उठाना। हैकर्स इसके ज़रिए ऐसे एंड्रॉइड ऐप बना रहे थे जो असली बैंकिंग ऐप जैसे दिखते थे। लोगों को लुभावने ऑफर देकर इन ऐप्स को डाउनलोड करवाया जाता था, जिसके बाद मैलवेयर मोबाइल का पूरा कंट्रोल लेकर बैंकिंग डिटेल्स, OTP और अन्य संवेदनशील जानकारी चुरा लेता था। कुछ मामलों में, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को निशाना बनाकर उनकी निजी जानकारी Firebase पर होस्ट किए गए डेटाबेस में भेजी जा रही थी।
टेक कंपनियों पर बढ़ता दबाव
यह सरकारी निर्देश भारत में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों में एक बड़ा कदम है। साल 2025 में नागरिकों को ऐसे फ्रॉड से करीब $2.4 बिलियन का नुकसान होने का अनुमान है। यह कार्रवाई IT एक्ट के तहत टेक कंपनियों की कानूनी जवाबदेही पर भी ज़ोर देती है। कानून के मुताबिक, प्लेटफॉर्म्स को तीसरे पक्ष द्वारा बनाई गई अवैध सामग्री के लिए 'सेफ हार्बर' मिलता है, लेकिन यह सुरक्षा तभी तक है जब तक वे सरकार के हटाए जाने के नोटिस पर 3 घंटे के अंदर कार्रवाई करते हैं। I4C का यह कदम दिखाता है कि वे इन समय-सीमाओं को सख्ती से लागू करेंगे।
Google का पक्ष और आगे की राह
Google ने कहा है कि वे I4C के साथ सहयोग कर रहे हैं और उनकी नीतियों के अनुसार फिशिंग, मैलवेयर या वित्तीय धोखाधड़ी के दुरुपयोग के खिलाफ कड़े नियम हैं। कंपनी हटाए जाने की सूचनाओं का मूल्यांकन कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कंपनियां अपनी सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए बढ़ी हुई निगरानी की लागत का प्रबंधन कर पाती हैं। रेगुलेटरी दबाव बढ़ने के साथ, टेक कंपनियों को नियामक बाधाओं से बचने के लिए और ज़्यादा सख्त सुरक्षा उपायों और तेज़ प्रतिक्रिया तंत्र लागू करने की ज़रूरत होगी।
