India के IT मंत्रालय (MeitY) ने AI प्लेटफॉर्म्स के लिए कानूनी परिभाषाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। इस कदम से 'सेफ हार्बर' (Safe Harbor) सुरक्षा छिन सकती है, जिससे कंपनियों की कानूनी जवाबदेही और कंप्लायंस कॉस्ट में बड़ा इजाफा हो सकता है।
कानूनी बदलाव और चिंताएं
Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक अलग कानून लाने पर विचार कर रहा है। फिलहाल, Information Technology Act 2000 और 2021 के इंटरमीडियरी गाइडलाइंस के तहत कंपनियों को 'सेफ हार्बर' प्रोटेक्शन मिलता है, जो उन्हें यूजर द्वारा डाले गए कंटेंट की जिम्मेदारी से बचाता है।
क्यों है सरकार सख्त?
नीति निर्माताओं का तर्क है कि AI सिस्टम पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अलग हैं। जहां सोशल मीडिया सिर्फ कंटेंट होस्ट करता है, वहीं AI खुद डेटा सिंथेसाइज कर नया कंटेंट जनरेट करता है। मिसइंफॉर्मेशन और डीपफेक जैसे खतरों के कारण सरकार अब इन्हें अलग जवाबदेही के दायरे में लाना चाहती है।
टेक दिग्गजों का रुख
बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां इस व्यापक कानून का विरोध कर रही हैं। उनका तर्क है कि एक ही कानून सभी AI टूल्स पर थोपने से इनोवेशन रुक सकता है। वे चाहती हैं कि हेल्थकेयर या फाइनेंस जैसे सेक्टर्स के लिए अलग-अलग नियम बनाए जाएं, न कि एक 'ब्लैंकेट पॉलिसी'।
निवेशकों के लिए जोखिम
यदि सरकार 'सेफ हार्बर' सुरक्षा को हटाती या सीमित करती है, तो कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन, कानूनी बीमा और कंप्लायंस पर भारी निवेश करना होगा। इसका सीधा असर मुनाफे के मार्जिन पर पड़ेगा। सरकार अभी European Union के AI Act जैसे मॉडल्स का अध्ययन कर रही है। निवेशकों को आने वाले समय में MeitY की आधिकारिक घोषणाओं और ड्राफ्ट रेगुलेशन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
