Cyber GCCs in India: अब ग्लोबल कमांड सेंटर बन रहा भारत, AI के दम पर बदल रही तस्वीर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Cyber GCCs in India: अब ग्लोबल कमांड सेंटर बन रहा भारत, AI के दम पर बदल रही तस्वीर

भारत के साइबर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब केवल सपोर्ट हब नहीं रहे, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक पावरहाउस बन गए हैं। अब **51%** ग्लोबल कंपनियां अपने साइबर ऑपरेशंस की कमान भारत में बैठे लीडर्स को सौंप रही हैं, जो देश के टेक ईकोसिस्टम के लिए एक बड़ा बदलाव है।

भारत की नई पहचान: बैक-ऑफिस से कमांड सेंटर तक

'Secure in India 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रोल अब केवल रूटीन मेंटेनेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल लेवल पर स्ट्रैटेजिक फैसले लेने की जिम्मेदारी भी यहीं से तय हो रही है। अब 80% से ज्यादा GCCs सीधे ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी कमेटियों का हिस्सा हैं, जिससे भारत की भूमिका और भी अहम हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि 25% से ज्यादा सेंटर्स में कंपनी का आधा वर्कफोर्स काम कर रहा है, जो यह साबित करता है कि कंपनियां अब अपने कोर सिक्योरिटी फंक्शन्स को भारत में शिफ्ट कर रही हैं।

AI का तड़का और बदलता बिजनेस मॉडल

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। कंपनियां भारत के टैलेंट का उपयोग करके ऐसे AI-ड्रिवन टूल्स बना रही हैं, जो थ्रेट डिटेक्शन और सिक्योरिटी रिस्क को तेजी से मैनेज करते हैं। अब फोकस सिर्फ 'कॉस्ट-आर्बिट्रेज' (पैसा बचाने) पर नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी बनाने पर है।

गवर्नेंस और रिस्क का नया मोर्चा

जैसे-जैसे हम AI की तरफ बढ़ रहे हैं, चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। डीपफेक और ऑटोमेटेड वल्नरेबिलिटी जैसे रिस्क को मैनेज करने के लिए अब कड़े गवर्नेंस की जरूरत है। साथ ही, डेटा प्राइवेसी और ग्लोबल रेगुलेटरी कंप्लायंस को संभालना इन सेंटर्स के लिए टॉप प्रायोरिटी बन गया है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि आने वाले समय में जो कंपनियां इनोवेशन और सख्त सिक्योरिटी गवर्नेंस के बीच तालमेल बिठा पाएंगी, वही मार्केट में लंबी रेस की खिलाड़ी साबित होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.