Sensitive Tech Imports पर भारत का सख्त कदम! CCTV के बाद अब इन चीज़ों पर लग सकती है पाबंदी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Sensitive Tech Imports पर भारत का सख्त कदम! CCTV के बाद अब इन चीज़ों पर लग सकती है पाबंदी

भारतीय सरकार अब संवेदनशील टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स (sensitive technology components) के आयात पर सुरक्षा प्रतिबंध (security restrictions) को और बढ़ाने की तैयारी में है। यह कदम CCTV आयात के मौजूदा नियमों जैसा ही होगा, जिसका मकसद क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करना है।

क्यों बदले जा रहे हैं नियम?

सरकार का मानना है कि गैर-भरोसेमंद देशों से आने वाले कंपोनेंट्स डेटा सुरक्षा और अनधिकृत पहुंच के जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, अब सरकार उन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के आयात पर सख्ती बरतने का विचार कर रही है, जो पहले से CCTV कैमरों के लिए लागू नियमों से कहीं आगे हैं। इसका सीधा लक्ष्य एक 'ट्रस्टेड सप्लाई चेन' (trusted supply chain) बनाना है, खासकर सेमीकंडक्टर चिप्स (semiconductor chips) और सुरक्षा-संवेदनशील हार्डवेयर में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव कंपोनेंट्स के लिए।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

इस पॉलिसी के पीछे सरकार की मंशा यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील जगहों पर इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स में ऐसे कंपोनेंट्स हों जिनकी सुरक्षा जांच (security vetting) हो चुकी हो। सरकार चाहती है कि इन कंपोनेंट्स का डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग देश में ही हो, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए एक 'कैप्टिव मार्केट' (captive market) तैयार हो सके।

CCTV सेक्टर में इस रणनीति के अच्छे नतीजे देखने को मिल रहे हैं। शुरुआत में इंडस्ट्री की ओर से आयात प्रतिबंधों का विरोध हुआ था, लेकिन अब घरेलू मैन्युफैक्चरिंग काफी बढ़ गई है। वर्तमान में, सरकार की डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम के तहत दो कंपनियां खास तौर पर CCTV कैमरों के लिए चिप्स बना रही हैं।

सुरक्षा पर फोकस

सरकार के मुताबिक, सिर्फ घरेलू चिप प्रोडक्शन ही काफी नहीं है, बल्कि इन चिप्स के लिए एक सुनिश्चित बाज़ार बनाना भी इस सेक्टर के लिए बहुत ज़रूरी है। संवेदनशील टेक्नोलॉजी एप्लीकेशंस में भरोसेमंद कंपोनेंट्स के इस्तेमाल को अनिवार्य करके, सरकार स्थानीय सेमीकंडक्टर फर्मों को ज़रूरी मांग (demand) प्रदान करना चाहती है और उन ग्लोबल सप्लाई चेन्स पर निर्भरता कम करना चाहती है जिनसे सुरक्षा जोखिम (security risks) पैदा हो सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है?

निवेशकों के लिए, इन नियमों का विस्तार इलेक्ट्रॉनिक्स, सर्विलांस और डिफेंस-सम्बन्धी टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों को प्रभावित कर सकता है। जिन कंपनियों के सप्लाई चेन में गैर-भरोसेमंद, आयातित कंपोनेंट्स का ज़्यादा इस्तेमाल होता है, उन्हें लागत बढ़ने या सप्लाई चेन में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है, खासकर अगर उन्हें भरोसेमंद घरेलू विकल्पों पर स्विच करना पड़े। वहीं, दूसरी ओर, घरेलू सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट निर्माताओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

आगे क्या?

आगे यह देखना होगा कि सरकार CCTV के अलावा किन और सेक्टर्स को टारगेट करती है। निवेशकों को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) की भविष्य की घोषणाओं पर नज़र रखनी चाहिए ताकि इन नियमों की समय-सीमा, प्रभावित कंपोनेंट्स की लिस्ट और घरेलू निर्माताओं को मिलने वाले सपोर्ट के बारे में जानकारी मिल सके। इस पॉलिसी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्थानीय कंपनियां सुरक्षा की कड़ी ज़रूरतों को पूरा करते हुए, आयातित कंपोनेंट्स की लागत और गुणवत्ता का मुकाबला कर पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.