भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम सरकारी मदद से तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन स्टार्टअप्स के लिए अब कॉमर्शियल लेवल पर टिके रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्लोबल कंपनियों के सामने कीमत का मुकाबला करना फिलहाल एक बड़ी बाधा है।
चुनौती क्या है?
साल 2021 में भारत सरकार की Design Linked Incentive (DLI) स्कीम आने के बाद देश में 100 से ज्यादा सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स सक्रिय हुए हैं। हालांकि, Cadence Design Systems की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अब ये स्टार्टअप्स उस मोड़ पर हैं जहां डिजाइन से आगे बढ़कर कॉमर्शियल प्रोडक्ट बनाना कठिन हो रहा है।
भारतीय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत कॉस्ट डिसएडवांटेज की है। ग्लोबल कंपनियां पुराने और पूरी तरह से डेप्रिसिएटेड (depreciated) प्लांट का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे वे बहुत कम दाम पर चिप्स बेच पाती हैं। वहीं, नए स्टार्टअप्स के लिए सिलिकॉन की टेस्टिंग और डेवलपमेंट का शुरुआती खर्च बहुत ज्यादा होता है।
कैसे टूटेगा यह चक्र?
कीमत कम करने के लिए स्टार्टअप्स को भारी मात्रा में प्रोडक्शन की जरूरत है, लेकिन बिना कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग के इतना बड़ा ऑर्डर मिलना मुश्किल है। इसका एकमात्र हल डोमेस्टिक एडॉप्शन है। डिफेंस और सिक्योरिटी जैसे सेक्टर, जहां सरकार 'मेड इन इंडिया' चिप्स पर जोर दे रही है, ये स्टार्टअप्स के लिए पहली बड़ी मांग पैदा कर सकते हैं।
एआई (AI) का रोल
डिजाइनिंग के काम में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जा रहा है। Cadence जैसी कंपनियां एआई टूल्स का उपयोग करके डिजाइन में होने वाली गलतियों को समय से पहले पकड़ रही हैं। हालांकि, इंडस्ट्री का मानना है कि एआई सिर्फ एक असिस्टेंट (assistant) है; जटिल चिप डिजाइन के लिए मानवीय समझ और अनुभव अब भी अनिवार्य है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब सिर्फ डिजाइन ग्रांट्स या नई कंपनियों की संख्या पर ध्यान नहीं देना चाहिए। असली खेल अब हाई-वॉल्यूम मैन्युफैक्चरिंग और सस्टेनेबल मार्केट तलाशने का है। डिफेंस और सिक्योरिटी सेक्टर में घरेलू मांग की हलचल पर नजर रखना, आने वाले समय में इन स्टार्टअप्स की सफलता का पैमाना होगा।
