भारत सरकार ने तीन चीनी ऐप्स - BAT-BMS, Lossigy, और Epoch-i-ion - को ऐप स्टोर से हटा दिया है। आरोप है कि ये ऐप्स बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सेंध लगाकर ई-रिक्शा को दूर से बंद कर सकते थे। यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर में साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरों को उजागर करता है।
क्या हुआ?
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) ने तीन मोबाइल ऐप्स - BAT-BMS, Lossigy, और Epoch-i-ion - को ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। सरकार ने यह कदम तब उठाया जब रिपोर्टें सामने आईं कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा की बैटरी पावर को दूर से डिसेबल (बंद) करने के लिए किया जा रहा था। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को पुष्टि की कि जैसे ही यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, ऐप्स को हटा दिया गया। यह मुद्दा तब प्रकाश में आया जब वीडियो वायरल हुए जिनमें ई-रिक्शा अचानक बंद होते दिख रहे थे, जिससे देश के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट-कनेक्टेड वाहन सिस्टम की सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ गईं।
बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का दुरुपयोग
ये एप्लिकेशन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के साथ इंटरैक्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो बैटरी तापमान, वोल्टेज और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण डेटा की निगरानी करता है। हालांकि, जांच में पाया गया कि ऐप्स ने सस्ते, चीनी-निर्मित बैटरी सिस्टम में सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाया। इनमें से कई सिस्टम में उनके ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के लिए बेसिक पासवर्ड सुरक्षा या एन्क्रिप्शन की कमी है। क्योंकि ये सिस्टम छोटी दूरी के वायरलेस कनेक्शन पर काम करते हैं, पास का कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के जरिए वाहन की बैटरी से कनेक्ट हो सकता है और पावर सप्लाई को रोक सकता है, जिससे ड्राइवर बीच रास्ते में फंस सकता है।
EV कंपोनेंट्स के लिए सुरक्षा जोखिम
यह घटना भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा करती है। कई एंट्री-लेवल ई-रिक्शा लागत-प्रभावी, आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भर करते हैं। यह घटना बताती है कि जहां ये कंपोनेंट्स काम करते हैं, वहीं वे अक्सर मजबूत साइबर सुरक्षा पर कम लागत को प्राथमिकता देते हैं। जैसे-जैसे लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति बढ़ रही है, वाहन प्रबंधन सॉफ्टवेयर के लिए मानकीकृत सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी ड्राइवरों और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए बार-बार ऑपरेशनल जोखिम पैदा कर सकती है।
सरकारी निगरानी और ऐप स्टोर की जिम्मेदारी
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को उनके द्वारा होस्ट किए जाने वाले सॉफ्टवेयर के संबंध में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। अब सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह ऐप स्टोर के साथ चर्चा करेगी ताकि उन एप्लिकेशन्स के लिए वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं को मजबूत किया जा सके जो हार्डवेयर के साथ इंटरफेस करते हैं, खासकर ऑटोमोटिव और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में। दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने भी स्थानीय वाहन ऑपरेटरों पर इन एप्लिकेशन्स के प्रभाव को समझने के लिए स्थिति की समीक्षा शुरू की है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए
निवेशकों के लिए, भारत में ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और EV कंपोनेंट्स के लिए नियामक मानकों के सख्त होने पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। साइबर सुरक्षा पर सरकार का ध्यान निर्माताओं और कंपोनेंट सप्लायर्स के लिए सख्त अनुपालन आवश्यकताओं को जन्म दे सकता है, जो उत्पादन लागत या उत्पाद डिजाइन विकल्पों को प्रभावित कर सकता है। भविष्य में, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हार्डवेयर सुरक्षा सर्टिफिकेशन से संबंधित किसी भी नई सरकारी अधिसूचना और यह भारतीय EV निर्माताओं द्वारा बैटरी प्रबंधन प्रणालियों की मूल्य निर्धारण और चयन को कैसे प्रभावित करता है, इस पर नजर रखी जानी चाहिए।
