भारत में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच **111** नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) खुले हैं, जो पिछले साल की रफ्तार को पीछे छोड़ चुके हैं। इससे **75,000** नौकरियां पैदा होने और **$2.8 बिलियन** का इकोनॉमिक इम्पैक्ट आने की उम्मीद है।
भारत के कॉर्पोरेट जगत में विस्तार का एक नया दौर शुरू हो चुका है। साल 2026 के पहले आठ महीनों में ही 111 नए ग्रीनफील्ड GCCs स्थापित किए गए हैं। यह रफ्तार पिछले साल की तुलना में काफी तेज है, क्योंकि 2025 में 100 सेंटर्स के आंकड़े तक पहुंचने में पूरा एक साल लग गया था। ये सेंटर्स केवल सपोर्ट यूनिट्स नहीं, बल्कि AI, हाई-वैल्यू रिसर्च और ग्लोबल इंजीनियरिंग के पावरहाउस बन रहे हैं।\n\n### कहां हो रही है सबसे ज्यादा ग्रोथ?\n\nइस विस्तार का सबसे ज्यादा फायदा टेक्नोलॉजी हब वाले शहरों को मिल रहा है। Hyderabad इस रेस में सबसे आगे है, जहां 40 नए सेंटर्स खुले हैं। इसके बाद Bengaluru (30) और Pune (18) का नंबर आता है। इसके अलावा, Chennai, Mumbai और Delhi-NCR में भी नए ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ी है, जो रियल एस्टेट और ऑफिस REITs के लिए एक अच्छा संकेत है।\n\n### विदेशी कंपनियां क्यों कर रही हैं निवेश?\n\nइनमें से 28 नए सेंटर्स सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर से हैं। मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग और हेल्थकेयर कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) है। Nestlé, Rockwell Automation और Edwards Lifesciences जैसी दिग्गज कंपनियां भारत के टैलेंट का लाभ उठाने के लिए यहां अपने ऑपरेशंस को कंसोलिडेट कर रही हैं।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी (Investor Monitorables)\n\nयह ग्रोथ भले ही इकॉनमी के लिए अच्छी हो, लेकिन निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। तेजी से होती हायरिंग से टेक्नोलॉजी सेक्टर में 'वेज इन्फ्लेशन' (सैलरी का बढ़ना) हो सकता है, जिससे घरेलू IT कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, ये सेंटर्स ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े हैं, इसलिए दुनिया भर में मंदी की आहट होने पर इनकी विस्तार योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
