IIT Madras-इंक्यूबेटेड स्टार्टअप Inbound Aerospace ने ऑस्ट्रेलिया के Space Angel Group के साथ एक बड़ी साझेदारी की है। इस करार का मुख्य उद्देश्य रियूजेबल री-एंट्री व्हीकल्स का परीक्षण करना और स्पेस-टू-अर्थ कार्गो लॉजिस्टिक्स को विकसित करना है।
चेन्नई स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप Inbound Aerospace ने ऑस्ट्रेलिया के Space Angel Group के साथ एक स्ट्रैटेजिक एमओयू (MoU) साइन किया है। 9वें बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में हुई इस घोषणा के बाद, अब कंपनी ऑस्ट्रेलिया के स्पेसपोर्ट और रिकवरी इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग अपने 'लिफ्टिंग-बॉडी सिस्टम' के परीक्षण के लिए कर सकेगी।
मिशन का लक्ष्य और तकनीक
इस साझेदारी का मुख्य मकसद स्टार्टअप की तकनीक को ग्राउंड टेस्टिंग से हटाकर एक्टिव मिशन डिप्लॉयमेंट तक ले जाना है। Space Angel की सुविधाओं के जरिए कंपनी ऐसे ऑटोनॉमस स्पेसक्राफ्ट विकसित करना चाहती है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) से सामान, बायोलॉजिकल सैंपल और मैन्युफैक्चरिंग गुड्स को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस ला सकें।
सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह कदम?
फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और बायोटेक जैसे उद्योगों के लिए माइक्रो-ग्रेविटी वातावरण में रिसर्च करना बेहद फायदेमंद है, लेकिन असली चुनौती रिसर्च के बाद सामान को सुरक्षित पृथ्वी पर लाने की होती है। रियूजेबल स्पेसक्राफ्ट इस लॉजिस्टिक्स लागत को काफी कम कर सकते हैं।
निवेश और जोखिम का गणित
Inbound Aerospace फिलहाल एक अनलिस्टेड स्टार्टअप है। जुलाई 2025 तक कंपनी ने $1 मिलियन से ज्यादा की प्री-सीड फंडिंग जुटाई थी। चूंकि यह एक अर्ली-स्टेज स्टार्टअप है, इसलिए इसमें बड़ा रिस्क है। कंपनी का भविष्य पूरी तरह से अगले फंडिंग राउंड्स और सफल फ्लाइट टेस्ट पर टिका है। अभी इसका कोई शेयर मार्केट डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी सफलता भविष्य में स्पेस-टेक इन्वेस्टमेंट के लिए एक नया पैमाना तय कर सकती है।
