भारत का पहला टेक यूनिकॉर्न InMobi अब पब्लिक मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रहा है। कंपनी सालों से अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव और उतार-चढ़ाव से जूझ रही है। सालाना **1.5 ट्रिलियन** एडवरटाइजमेंट सर्व करने वाली इस कंपनी के लिए अब प्रॉफिटेबिलिटी साबित करना सबसे बड़ी चुनौती है।
साल 2011 में भारत के पहले टेक यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करने वाली InMobi अब एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। साल 2007 में नवीन तिवारी और उनकी टीम द्वारा 'mKhoj' के नाम से शुरू हुई यह कंपनी अब पब्लिक मार्केट की राह देख रही है। शुरुआत में SMS-आधारित सर्च इंजन के रूप में काम करने वाली इस कंपनी ने मोबाइल विज्ञापन के क्षेत्र में कदम रखा, जिसने इसे तेजी से स्केल करने में मदद की। 2011 में SoftBank से मिले $200 मिलियन के निवेश ने इसे ग्लोबल स्तर पर खड़ा कर दिया।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और रेवेन्यू में अस्थिरता
टेक्नोलॉजी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए InMobi का इतिहास किसी केस स्टडी से कम नहीं है। कंपनी के प्रदर्शन में काफी अस्थिरता रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू $364 मिलियन तक पहुंच गया था, जो 2020 में घटकर $150 मिलियन रह गया। हाल के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, रेवेन्यू करीब $220 मिलियन रहा, जिसमें $77 मिलियन का घाटा दर्ज किया गया, जबकि 2023 में कंपनी ने $42 मिलियन का मुनाफा कमाया था। डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट और डेटा प्राइवेसी नियमों के कारण यह उतार-चढ़ाव काफी सामान्य माना जाता है।
स्ट्रैटेजिक विस्तार और AI का दांव
चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी ने विज्ञापन से आगे बढ़कर अपने बिजनेस को डायवर्सिफाई किया है। 2019 में Android लॉक स्क्रीन के लिए AI-आधारित कंटेंट प्लेटफॉर्म 'Glance' की शुरुआत इसका एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, कंपनी ने 2026 में 'Mobile Action' का अधिग्रहण किया है, ताकि AI-आधारित ऐप ग्रोथ और Apple जैसे इकोसिस्टम पर अपनी पकड़ मजबूत की जा सके।
भविष्य की राह
कंपनी 150 देशों में काम कर रही है और सालाना 1.5 ट्रिलियन विज्ञापन दिखा रही है। लेकिन IPO की सफलता केवल इस स्केल पर निर्भर नहीं करेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी अपने रेवेन्यू को स्थिर कर पाएगी और लगातार प्रॉफिट दिखाने में सफल होगी या नहीं। बड़े ग्लोबल प्लेयर्स से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच, InMobi के लिए AI इनोवेशन में बने रहना ही आगे का रास्ता है।
