आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खतरों के बीच TCS, HCLTech और Wipro जैसी बड़ी IT कंपनियां अब 'साइबर रिकवरी' पर अपना फोकस शिफ्ट कर रही हैं। हैकर्स अब केवल **39 सेकंड** में नेटवर्क में सेंध लगा रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए सुरक्षा का तरीका पूरी तरह से बदल गया है।
साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। AI के जरिए हैकर्स अब महज 39 सेकंड में किसी भी नेटवर्क के सुरक्षा घेरे को तोड़ रहे हैं। इस तेजी ने पुराने सिक्योरिटी टूल्स को अप्रचलित कर दिया है, जिसके चलते अब कंपनियां केवल 'बचाव' (Prevention) तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। भारतीय IT सर्विसेज कंपनियों के लिए यह एक नए बिजनेस अवसर की तरह है, जहाँ वे 'साइबर रिकवरी' सॉल्यूशंस के जरिए क्लाइंट्स को सुरक्षा दे रही हैं।
नई पार्टनरशिप और तकनीक
Tata Consultancy Services (TCS), HCLTech, Wipro और LTIMindtree जैसी कंपनियां अब Rubrik जैसे स्पेशलाइज्ड साइबर सिक्योरिटी वेंडर्स के साथ मिलकर काम कर रही हैं। ये कंपनियां AI-आधारित ऑडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं, जो कोड में खामियों को हैकर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने से पहले ही पकड़ लेते हैं। यह निवेश कंपनियों के लिए बड़े एंटरप्राइज बजट का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने का जरिया है।
निवेशकों के लिए अहम बदलाव
निवेशकों को यह समझना होगा कि अब प्राथमिकता 'फायरवॉल' से बदलकर 'साइबर रेजिलिएंस' (Cyber Resilience) पर आ गई है। यानी, अगर हमला होता है, तो कंपनी कितनी जल्दी वापस पटरी पर लौटती है। हालांकि, इस सेक्टर में बढ़ती जटिलता और एआई-इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस की लागत का असर शॉर्ट टर्म में कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
जो कंपनियां डेटा रिकवरी को 'मशीन स्पीड' पर करने में महारत हासिल करेंगी, वे भविष्य के ग्लोबल सिक्योरिटी मार्केट में लीडर बनकर उभरेंगी।
