भारतीय IT कंपनियां अब AI और डिजिटल स्किल्स वाले ग्रेजुएट्स को ₹7 से ₹12 लाख तक का शुरुआती पैकेज दे रही हैं। ये कंपनियां अब पुराने एंट्री-लेवल रोल्स से हटकर ऑटोमेशन और हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही हैं, क्योंकि कोडिंग के आम काम अब AI से हो रहे हैं।
IT सेक्टर में बड़ा बदलाव: AI का बढ़ा दबदबा
साल 2026 के प्लेसमेंट सीजन के लिए भारतीय IT सर्विस सेक्टर अपनी हायरिंग स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव ला रहा है। अब कंपनियां एंट्री-लेवल रोल्स के लिए पुराने ₹3-4 लाख के सालाना पैकेज से आगे बढ़ रही हैं। उनकी जगह 'डिजिटल' और 'प्राइम' जैसी नई पोजिशंस आ गई हैं, जिनमें ₹7 लाख से लेकर ₹12 लाख तक का पैकेज ऑफर किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से इंटीग्रेशन है, जिसके चलते मैनुअल कोडिंग और टेस्टिंग जैसे जूनियर रोल्स की डिमांड कम हो रही है।
स्पेशल टैलेंट पर फोकस
बड़ी IT कंपनियां जैसे Tata Consultancy Services (TCS) में यह बदलाव साफ दिख रहा है। उनके करीब 65% ऑफर्स अब इन हाई-वैल्यू रोल्स के लिए जा रहे हैं। Infosys और Cognizant जैसी दूसरी बड़ी IT सर्विस फर्म्स में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। ये कंपनियां उन कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास क्लाउड कंप्यूटिंग, एनालिटिक्स, डिजिटल ऑपरेशंस और AI जैसे क्षेत्रों में खास एक्सपर्टीज है। AI टूल्स के साथ काम करने वाले ग्रेजुएट्स को हायर करके, कंपनियां प्रोजेक्ट्स की एफिशिएंसी बढ़ाना और वैल्यू चेन में ऊपर जाना चाहती हैं।
कॉलेज कैंपस में रिक्रूटमेंट ड्राइव्स के दौरान भी यह बदलाव दिख रहा है। रिक्रूटर्स अब जनरल कैंडिडेट्स की तलाश में नहीं हैं, बल्कि ऐसे 'स्मार्ट' फ्रेशर्स को ढूंढ रहे हैं जो अपने करियर की शुरुआत से ही कॉम्प्लेक्स टेक्नोलॉजिकल डिमांड्स के लिए तैयार हों।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इस नई हायरिंग स्ट्रेटेजी का असर कंपनियों के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर पड़ेगा। हालांकि IT फर्म्स एंट्री-लेवल रिक्रूट्स को ज्यादा सैलरी दे रही हैं, लेकिन इसके बदले प्रोडक्टिविटी में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। अगर IT कंपनियां AI-इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस से कम वैल्यू वाले कोडिंग वर्क को बदलने में सफल होती हैं, तो इससे लंबे समय में उनके ऑपरेटिंग मार्जिन को सपोर्ट मिल सकता है।
लेकिन, असली चुनौती इसे लागू करने में है। अगर AI टूल्स से प्रोडक्टिविटी में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं होती है, या फर्म्स इन 'डिजिटल' सर्विसेज के लिए प्रीमियम प्राइस नहीं ले पाती हैं, तो बढ़ी हुई सैलरी का बोझ प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डाल सकता है।
इसके अलावा, पुराने एंट्री-लेवल रोल्स का खत्म होना इंडस्ट्री के टैलेंट पाइपलाइन के लिए एक नई चुनौती पेश करेगा। छोटी IT फर्म्स या जो पुराने बिजनेस मॉडल्स पर निर्भर हैं, उन्हें इस स्पेशलाइज्ड टैलेंट को कंपीट करना मुश्किल हो सकता है, जिससे इंडस्ट्री में एक तरह का बंटवारा देखने को मिल सकता है। जैसे-जैसे 2026 का प्लेसमेंट सीजन आगे बढ़ेगा, निवेशकों को मैनेजमेंट से 'डिजिटल' और 'प्राइम' हायरिंग मिक्स, इन नए रिक्रूट्स के यूटिलाइजेशन रेट्स और इस स्ट्रेटेजी से रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर के बारे में जानकारी पर नजर रखनी होगी।
