भारतीय रेलवे ने IRCTC की नई बीटा वेबसाइट लॉन्च कर दी है। इस नए पोर्टल में इंटरफ़ेस को और क्लीन और चेकआउट को फ़ास्ट बनाया गया है। इसका मकसद रोज़ाना लाखों यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग के अनुभव को बेहतर बनाना है।
टिकट बुकिंग का अनुभव होगा बेहतर
भारतीय रेलवे ने IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च किया है। यह कदम लाखों यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग के अनुभव को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। यह पोर्टल बुधवार को लाइव हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य टिकट खरीदने में लगने वाले समय और स्टेप्स को कम करना है। हर दिन लगभग 14.5 लाख टिकट बुक करने वाले इस प्लेटफॉर्म को भारत की सबसे ज़्यादा ट्रैफिक वाली ई-कॉमर्स साइट्स में से एक माना जाता है। नया इंटरफ़ेस साइट की स्पीड और नेविगेशन से जुड़ी पुरानी चिंताओं को दूर करने का लक्ष्य रखता है।
बुकिंग प्रक्रिया को किया गया आसान
इस नई वेबसाइट में फालतू की चीजों जैसे कि ज़्यादा पॉप-अप और ग्राफ़िक्स को हटाकर, एक क्लीन और ज़्यादा सहज डिज़ाइन पर फोकस किया गया है। यूज़र्स के लिए एक बड़ा बदलाव यह है कि अब वे एक ही स्क्रीन पर सभी ट्रेन क्लासेस के लिए सीट की उपलब्धता देख सकते हैं, जिससे सर्च प्रोसेस आसान हो जाएगा। चेकआउट फ्लो को भी ज़्यादा एफिशिएंट बनाया गया है, जिससे बार-बार टिकट बुक करने वाले यात्री अपनी डिटेल्स सेव करके तेज़ी से बुकिंग कर सकेंगे। इस कदम से ट्रांज़ैक्शन फाइनल करने के लिए ज़रूरी क्लिक्स की संख्या कम हो जाएगी।
डेवलपमेंट और भविष्य का इंटीग्रेशन
इस डिज़ाइन को बेहतर बनाने में जयपुर के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स से मिले फीडबैक ने अहम भूमिका निभाई है, जिन्होंने रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव के साथ अपनी इनसाइट्स शेयर की थीं। रेलवे मंत्रालय वर्तमान में बीटा साइट पर यूज़र फीडबैक आमंत्रित कर रहा है, जिसका विश्लेषण फाइनल पब्लिक रोलआउट से पहले ज़रूरी एडजस्टमेंट्स के लिए किया जाएगा। यह डेवलपमेंट एक बड़े टेक्नोलॉजी अपग्रेड का हिस्सा है, क्योंकि नया पोर्टल जल्द ही एक अपडेटेड पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन के साथ इंटीग्रेट होगा, जिसका पैरलल टेस्टिंग चल रहा है।
निवेशकों के लिए ऑपरेशनल बातें
IRCTC के निवेशकों के लिए, बुकिंग पोर्टल की एफिशिएंसी इसके बिज़नेस मॉडल का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि यह कंपनी के कन्वीनिएंस फी रेवेन्यू और ऑपरेशनल स्केल को बढ़ाता है। हालांकि मौजूदा सिस्टम 2002 से बड़े वॉल्यूम को संभाल रहा है, लेकिन एक मॉडर्न, तेज़ इंटरफ़ेस पर शिफ्ट होने से कस्टमर रिटेंशन और साइट परफॉरमेंस बेहतर होने की उम्मीद है। मैनेजमेंट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि प्लेटफॉर्म पीक लोड डिमांड को परफॉरमेंस में गिरावट के बिना संभाल सके। निवेशक इस प्लेटफॉर्म की लॉन्ग-टर्म टेक्निकल स्टेबिलिटी के प्रमुख संकेतकों के रूप में इंटीग्रेटेड रिजर्वेशन इंजन के आने वाले फुल-स्केल लॉन्च और बीटा फेज के दौरान यूज़र एडॉप्शन रेट्स पर नज़र रख सकते हैं।
