IIT मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई कूलिंग सिस्टम (Cooling System) तैयार की है, जिससे स्मार्टफोन और डेटा सेंटरों में गर्मी की समस्या **16%** तक कम हो सकती है। इस डिज़ाइन में एल्यूमीनियम (Aluminium) का इस्तेमाल तांबे (Copper) की तुलना में **20%** ज्यादा बेहतर नतीजे दे सकता है।
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गर्मी से छुटकारा, टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव?
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास की एक रिसर्च टीम ने थर्मल मैनेजमेंट (Thermal Management) के लिए एक नया डिज़ाइन पेश किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज (Electronic Devices) के गर्म होने की समस्या को सुलझा सकता है। इस टेक्नोलॉजी का नाम 'फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप' (Flat Plate Pulsating Heat Pipe) है। इसे खासतौर पर हाई-परफॉर्मेंस वाले हार्डवेयर (Hardware) के अंदरूनी तापमान को कम करने के लिए बनाया गया है। थर्मल रेजिस्टेंस (Thermal Resistance) यानी गर्मी को दूर करने की क्षमता में 16% की कमी लाकर, यह इनोवेशन कॉम्पैक्ट डिवाइसेज के लिए एक बड़ी चुनौती को आसान बनाएगा।
इंडस्ट्री पर क्या होगा असर?
आज के दौर में इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री के लिए गर्मी को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है। जैसे-जैसे स्मार्टफोन पतले होते जा रहे हैं और डेटा सेंटर (Data Center) पर लोड बढ़ रहा है, डिवाइसेज को भारी बनाए बिना गर्मी को मैनेज करना उनकी लाइफ और परफॉर्मेंस के लिए बहुत जरूरी है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ लैपटॉप या स्मार्टफोन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), एवियोनिक्स (Avionics) और डिफेंस (Defence) जैसे सेक्टर में भी होगा, जहां हर हाल में भरोसेमंद परफॉर्मेंस चाहिए।
एल्यूमीनियम का जादू, लागत में भी बचत!
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि एल्यूमीनियम का इस्तेमाल कॉपर (Copper) की तुलना में ज्यादा फायदेमंद है। एल्यूमीनियम वाले हीट पाइप (Heat Pipes) से थर्मल रेजिस्टेंस में 20% की और ज्यादा कमी आई है। मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) के नजरिए से यह इसलिए भी खास है क्योंकि एल्यूमीनियम, कॉपर के मुकाबले हल्का और सस्ता होता है। ऑटोमोटिव (Automotive) और एयरोस्पेस (Aerospace) इंडस्ट्री के लिए यह एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि वजन कम होने से फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) और रेंज (Range) बढ़ती है।
यह रिसर्च 27 जुलाई, 2026 को IIT मद्रास के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अरविंद पट्टमट्टा (Arvind Pattamatta) और प्रो. पल्लव सिन्हा महापात्रा (Pallab Sinha Mahapatra) की टीम ने पब्लिश की है। इस तरह की टेक्नोलॉजी अक्सर रिसर्च लैब से निकलकर इंडस्ट्री पार्टनरशिप (Industry Partnership) के जरिए ही मार्केट में आती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और सेमीकंडक्टर कूलिंग हार्डवेयर सेक्टर के निवेशकों को भविष्य में पेटेंट लाइसेंसिंग (Patent Licensing), नई पार्टनरशिप या पायलट प्रोजेक्ट्स (Pilot Programs) पर नजर रखनी चाहिए।
