IIT बॉम्बे एल्युमनस ऋषभ अग्रवाल को Nvidia और बेजोस का साथ, Meta के ₹1 करोड़+ ऑफर को ठुकराया!

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
IIT बॉम्बे एल्युमनस ऋषभ अग्रवाल को Nvidia और बेजोस का साथ, Meta के ₹1 करोड़+ ऑफर को ठुकराया!

IIT बॉम्बे के ग्रेजुएट ऋषभ अग्रवाल ने Nvidia और जेफ बेजोस के सपोर्ट वाली AI स्टार्टअप 'Periodic Labs' की सह-स्थापना की है। उन्होंने Meta से ₹1 करोड़ से अधिक के कॉर्पोरेट ऑफर को ठुकराकर AI साइंटिस्ट बनाने पर फोकस करने का फैसला किया है, जो रिसर्च परिकल्पनाएं (Research Hypotheses) तैयार कर सके।

200 करोड़ की डील ठुकराई, AI में नया फ्यूचर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के ग्रेजुएट ऋषभ अग्रवाल ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपने स्टार्टअप 'Periodic Labs' पर फोकस करने के लिए Meta के सुपरइंटेलिजेंस लैब्स से मिले 1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹8.3 करोड़) से भी ज़्यादा के ऑफर को ठुकरा दिया है। ऋषभ अग्रवाल, जो Google Brain, DeepMind और Waymo जैसे बड़े AI रिसर्च संस्थानों में काम कर चुके हैं, अब एक ऐसे AI साइंटिस्ट को बनाने पर काम कर रहे हैं जो वैज्ञानिक रिसर्च के लिए नई परिकल्पनाएं (hypotheses) तैयार कर सके।

दिग्गजों का भरोसा

Periodic Labs को Nvidia, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हार्डवेयर बनाने वाली लीडिंग कंपनी है, और अरबपति जेफ बेजोस जैसे बड़े नामों का सपोर्ट मिला है। इन दिग्गजों की एंट्री बताती है कि निवेशकों की इस स्टार्टअप के खास आइडिया में कितनी दिलचस्पी है। कंपनी का लक्ष्य AI की मदद से मेडिसिन, मैटेरियल्स साइंस और फिजिक्स जैसे खास क्षेत्रों में नई खोजों (breakthroughs) को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।

नौकरी या अपना भविष्य?

टेक कंपनियों में मोटी सैलरी वाली जॉब्स अक्सर करियर की सबसे बड़ी कामयाबी मानी जाती हैं। लेकिन ऋषभ का फैसला इस बात का संकेत है कि अनुभवी शोधकर्ता अब AI टूल्स बनाने में ज़्यादा ऑटोनॉमी (autonomy) चाहते हैं। कॉर्पोरेट सैलरी को छोड़कर खुद के इनोवेशन पर ध्यान देना, यह ट्रेंड इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है।

आगे क्या?

AI द्वारा खुद से परिकल्पनाएं सुझाने की क्षमता विकसित करना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। निवेशक और टेक एक्सपर्ट्स इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी रिसर्च कॉन्सेप्ट्स से प्रैक्टिकल एप्लीकेशन तक कैसे पहुंचती है। सबसे ज़रूरी यह देखना होगा कि क्या यह AI लगातार ऐसी वैज्ञानिक परिकल्पनाएं बना पाता है, जिन्हें लेबोरेटरी या इंडस्ट्री में वेरिफाई किया जा सके। कंपनी की तकनीकी प्रोग्रेस और AI प्लेटफॉर्म की स्केलेबिलिटी पर सबकी नज़रें रहेंगी।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.