IISc का बड़ा ऐलान: 65 भारतीय भाषाओं के लिए लॉन्च हुआ 'SraVaani' स्पीच AI मॉडल

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AuthorNeha Patil|Published at:
IISc का बड़ा ऐलान: 65 भारतीय भाषाओं के लिए लॉन्च हुआ 'SraVaani' स्पीच AI मॉडल

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने 'SraVaani' नाम का एक नया ओपन-सोर्स स्पीच AI मॉडल लॉन्च किया है। यह मॉडल 65 भारतीय भाषाओं और बोलियों को सपोर्ट करता है, जिससे देश की 25 करोड़ से ज़्यादा आबादी को फायदा होगा। ARTPARK और Google के सहयोग से विकसित यह टूल क्षेत्रीय भाषाओं में AI की पहुंच को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

65 भाषाओं को समझेगा AI

IISc के SPIRE Lab ने ARTPARK के साथ मिलकर और Google की मदद से SraVaani को तैयार किया है। यह स्पीच रिकग्निशन AI मॉडल खास तौर पर भारतीय भाषाओं के लिए बनाया गया है, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भाषा की बाधाओं को दूर किया जा सके।

25 करोड़ लोगों को मिलेगा फायदा

आज तक ज़्यादातर AI मॉडल चुनिंदा बड़ी भाषाओं पर ही ध्यान देते आए हैं, लेकिन SraVaani उन 25 करोड़ से ज़्यादा लोगों की ज़रूरतों को पूरा करेगा जिनकी भाषा को पहले कम महत्व दिया गया। इस मॉडल में 20 शेड्यूल भाषाओं के साथ 45 अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ भी शामिल हैं। इसे Hugging Face प्लेटफॉर्म पर ओपन-सोर्स (Open-Source) के तौर पर उपलब्ध कराया गया है। इसका मतलब है कि डेवलपर्स और स्टार्टअप्स इसे MIT लाइसेंस के तहत बिना किसी शुल्क के इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे भारत के लिए लोकल AI एप्लिकेशन बनाने की लागत और तकनीकी मुश्किलें काफी कम हो जाएंगी।

Vaani डेटासेट का कमाल

SraVaani को Vaani डेटासेट पर ट्रेन किया गया है। इस बड़े प्रोजेक्ट में भारत के 165 जिलों के 156,000 से ज़्यादा लोगों से 31,000 घंटे से ज़्यादा की रियल-टाइम स्पीच रिकॉर्ड की गई। इस डेटा की मदद से मॉडल को स्वाभाविक और आम बोलचाल की भाषा समझने में आसानी हुई। Garo भाषा में किए गए टेस्ट में SraVaani ने 9.5% वर्ड एरर रेट (Word Error Rate) हासिल किया, जो कि दूसरी मौजूदा प्रणालियों के मुकाबले काफी बेहतर है।

'Sovereign AI' की ओर बढ़ता कदम

SraVaani का लॉन्च भारतीय टेक सेक्टर के लिए 'Sovereign AI' बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इसका मतलब है कि अब भारत अपनी ज़रूरतों के हिसाब से AI तकनीक विकसित कर सकेगा, न कि सिर्फ ग्लोबल मॉडलों पर निर्भर रहेगा। यह मॉडल ऑटोमेटिक भाषा की पहचान (Automatic Language Identification) भी करता है, जिससे डेवलपर्स को वॉइस फीचर इंटीग्रेट करने के लिए ज़्यादा टेक्निकल जानकारी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर के लिए यह बहुत फायदेमंद होगा, जहाँ यूज़र्स तक उनकी अपनी भाषा में पहुंचना ज़रूरी है।

आगे की चुनौतियाँ

हालांकि, 65 भाषाओं में लगातार सटीकता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। बैकग्राउंड नॉइज़ (Background Noise) या अलग-अलग एक्सेंट (Accents) जैसी रियल-वर्ल्ड कंडीशंस (Real-world conditions) AI की परफॉरमेंस पर असर डाल सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ओपन-सोर्स टूल आने वाले महीनों में भारतीय भाषाओं पर आधारित डिजिटल सेवाओं के विकास की लागत को कैसे प्रभावित करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.