ICICI Lombard General Insurance ने टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहलों में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी अपने सालाना प्रीमियम आय का **1% से 1.5%** हिस्सा इन पहलों पर खर्च करेगी। इसका मकसद कस्टमर सर्विस की एफिशिएंसी बढ़ाना और पॉलिसी ऑपरेशंस को ऑटोमेट करना है।
AI और टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश
ICICI Lombard General Insurance ने टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। कंपनी अपनी सालाना प्रीमियम आय का 1% से 1.5% हिस्सा इन पहलों पर खर्च करने का ऐलान किया है। यह कदम कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाना, कस्टमर सर्विस की स्पीड बढ़ाना और बढ़ते ऑपरेशनल वॉल्यूम को मैनेज करना है। कंपनी ने अपनी 25वीं एनिवर्सरी के मौके पर यह घोषणा की, जहाँ मैनेजमेंट ने साफ किया कि बदलते इंश्योरेंस मार्केट में बने रहने के लिए टेक्नोलॉजी पर यह खर्च ज़रूरी है।
AI से कस्टमर सर्विस और ऑपरेशन्स में सुधार
कंपनी अपने डिजिटल इकोसिस्टम को ऐसे स्केल पर ले जाना चाहती है कि मैनुअल काम और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भरता कम हो। इसका एक बड़ा उदाहरण कंपनी का AI-पावर्ड वॉइस एजेंट है, जो अब लगभग 70% कस्टमर की क्वेरीज को हैंडल कर रहा है। पहले यह आंकड़ा सिर्फ 10% था। ज्यादातर कस्टमर कॉल्स को ऑटोमेट करके, इंश्योरर का लक्ष्य पॉलिसी की कॉस्ट कम करना और एंड-टू-एंड पॉलिसी खरीदने की सर्विस स्पीड बढ़ाना है। कंपनी ने बताया कि इस वॉइस एजेंट ने अब तक 10 लाख से ज्यादा कॉल्स को सफलतापूर्वक प्रोसेस किया है।
बिज़नेस ग्रोथ और भविष्य की राह
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के अलावा, कंपनी ने रेवेन्यू स्ट्रीम को डाइवर्सिफाई करने के लिए 25 नए प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किए हैं। इनमें महिलाओं के लिए खास हेल्थ प्लान, पेट इंश्योरेंस और लॉन्ग-टर्म प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं। मैनेजमेंट का भारतीय जनरल इंश्योरेंस सेक्टर के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को लेकर भरोसा कायम है, और उनका अनुमान है कि यह इंडस्ट्री इंडिया की GDP ग्रोथ से 1.5 गुना तेज रफ्तार से बढ़ सकती है। जैसे-जैसे लोगों की पर कैपिटा इनकम बढ़ेगी, मैनेजमेंट को उम्मीद है कि कंज्यूमर डिमांड इंडिविजुअल प्रोडक्ट्स की जगह बंडल्ड इंश्योरेंस पैकेजेस की ओर शिफ्ट होगी, जो डेवलप मार्केट्स में आम ट्रेंड है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह ट्रैक करना होगा कि टेक्नोलॉजी में लगातार हो रहे ये इन्वेस्टमेंट कंपनी के एक्सपेंस रेशियो और ओवरऑल प्रॉफिट मार्जिन को कैसे प्रभावित करते हैं। हालांकि इन खर्चों का मकसद एफिशिएंसी बढ़ाना है, लेकिन ये कंपनी की बैलेंस शीट पर एक रिकरिंग एक्सपेंस भी हैं। निवेशक भविष्य में आने वाले अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं कि क्या ये डिजिटल इनिशिएटिव्स ऑपरेशनल कॉस्ट को सफलतापूर्वक कम कर पाएंगे या फिर प्रीमियम ग्रोथ धीमी रहने पर खर्च का दबाव बढ़ेगा। कैपिटल-इंटेंसिव टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स को बैलेंस करते हुए कंपनी अपनी मार्केट पोजीशन कैसे बनाए रखती है, यह शेयरहोल्डर्स के लिए आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स में एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा।
