IBS Group का बड़ा दांव: ₹500 करोड़ के AI प्लान के साथ लॉन्च हुई Naviq Technology

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AuthorNeha Patil|Published at:
IBS Group का बड़ा दांव: ₹500 करोड़ के AI प्लान के साथ लॉन्च हुई Naviq Technology

IBS Group ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस करते हुए एक नई कंपनी Naviq Technology लॉन्च की है। अगले पांच सालों में इस पर ₹500 मिलियन (लगभग ₹4,000 करोड़) का निवेश किया जाएगा, ताकि ग्लोबल ट्रैवल इंडस्ट्री को मॉडर्न बनाया जा सके। यह वेंचर एयरलाइंस और हॉस्पिटैलिटी फर्म्स को AI सॉल्यूशंस देगा। कंपनी 2,000 प्रोफेशनल्स को हायर करके अपनी टीम का विस्तार करेगी।

AI में IBS Group का बड़ा दांव: Naviq Technology का आगाज

IBS Group ने ट्रैवल सेक्टर के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉल्यूशंस पर फोकस करने के लिए एक नई इकाई, Naviq Technology, लॉन्च की है। कंपनी अगले पांच सालों में इस पहल के लिए $500 मिलियन (लगभग ₹4,000 करोड़) का निवेश करेगी। इस फंड का इस्तेमाल एयरलाइंस, एयरपोर्ट, क्रूज लाइन्स और हॉस्पिटैलिटी व्यवसायों को उनके ऑपरेशंस को मॉडर्न बनाने और कस्टमर सर्विस को बेहतर बनाने में मदद करने वाले AI टूल्स विकसित करने के लिए किया जाएगा।

रणनीति और रिसोर्स एलोकेशन

Naviq Technology का मुख्य उद्देश्य ट्रैवल कंपनियों को AI अपनाने में मदद करना है, ताकि वे अपनी एफिशिएंसी बढ़ा सकें और कमाई के नए तरीके ढूंढ सकें। IBS Software, जो ग्रुप की मुख्य SaaS कंपनी है, ने पहले ही ट्रैवल टेक स्पेस में अपनी पहचान बनाई है और बड़े ग्लोबल एयरलाइंस के साथ संबंध बनाए हुए हैं। Naviq Technology इसी नींव का फायदा उठाकर अपने प्रोडक्ट डेवलपमेंट और क्लाइंट एक्विजिशन को तेजी से आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रही है।

बड़े पैमाने पर हायरिंग का लक्ष्य

ग्रुप ने ग्रोथ के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं। Naviq Technology का लक्ष्य अगले पांच सालों में 16 ग्लोबल सेंटर्स में 5,000 से अधिक प्रोफेशनल्स को हायर करना है। इस योजना के पहले चरण में 2,000 कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। साथ ही, कोच्चि में एक नया कैंपस भी तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन 23 जुलाई को केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीसन करेंगे। IBS Group का हेडक्वार्टर सिंगापुर में है, लेकिन भारत, खासकर केरल में इसकी मजबूत उपस्थिति है, जहाँ इसके तकनीकी कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा काम करता है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

निवेशकों और इंडस्ट्री ऑब्जर्वर्स के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इस $500 मिलियन के निवेश को कैसे प्रॉफिटेबल रेवेन्यू स्ट्रीम्स में बदल पाती है। AI एक हाई-ग्रोथ एरिया है, लेकिन इसमें टैलेंट और रिसर्च पर लगातार खर्च की जरूरत होती है, जिससे नियर-टर्म में कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है। कंपनी को यह साबित करना होगा कि वे इन AI सॉल्यूशंस को बड़ी एयरलाइंस और हॉस्पिटैलिटी ग्रुप्स के कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स में सफलतापूर्वक इंटीग्रेट कर सकते हैं। निवेशकों को क्लाइंट एडॉप्शन, 5,000 लोगों की हायरिंग टाइमलाइन और इस नई इकाई से ग्रुप के ओवरऑल ग्रोथ मार्जिन पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखनी चाहिए।

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