IBS Group ने ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए एक खास AI-फोकस्ड फर्म NAVIQ लॉन्च की है। इसकी शुरुआत **2,000** कर्मचारियों के साथ हुई है, जो इस कंपनी का बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बड़ा कदम
ट्रैवल, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर मार्केट की दिग्गज कंपनी IBS Group ने अब आधिकारिक तौर पर अपनी नई डिवीजन NAVIQ Technology की शुरुआत कर दी है। यह फर्म विशेष रूप से ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और क्रूज इंडस्ट्री के लिए AI टूल्स बनाने पर केंद्रित होगी। फिलहाल कंपनी की शुरुआत 2,000 प्रोफेशनल कर्मचारियों के साथ हुई है और आने वाले सालों में इसे बढ़ाकर 5,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। यह IBS Group की पुरानी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म वाली रणनीति से हटकर प्रोडक्ट-बेस्ड AI मॉडल की तरफ एक बड़ा बदलाव है।
डेटा के दम पर बढ़त की तैयारी
यह कदम भारतीय IT सेक्टर में दिख रहे एक बड़े ट्रेंड को दर्शाता है, जहां अब कंपनियां सामान्य सर्विस से हटकर हाई-मार्जिन और वर्टिकल-स्पेसिफिक सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस की तरफ बढ़ रही हैं। IBS Group के पास पहले से ही एयरलाइन, कार्गो और लॉयल्टी ऑपरेशंस का बड़ा डेटा है। नई कंपनी का मकसद इस विशाल डेटा का इस्तेमाल कर ऐसे AI मॉडल बनाना है, जो मार्केट में मौजूद अन्य जनरिक AI के मुकाबले कहीं ज्यादा सटीक हों।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, यह प्लान सुनने में काफी प्रभावशाली है, लेकिन कंपनी के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है तेजी से मैनपावर को स्केल करना। हाई-एंड AI डोमेन में 3,000 अतिरिक्त प्रोफेशनल को न केवल हायर करना, बल्कि उन्हें ट्रेन करना एक जटिल प्रक्रिया है। साथ ही, ट्रैवल इंडस्ट्री में सटीकता सबसे महत्वपूर्ण है। फ्लाइट शेड्यूलिंग, प्राइसिंग या सुरक्षा से जुड़े फैसलों में AI की कोई भी गलती कंपनी की साख और कामकाज के लिए बड़ा रिस्क पैदा कर सकती है।
निवेशकों और जानकारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि कंपनी कितनी जल्दी इस AI पहल को रेवेन्यू में बदल पाती है।
