IBM इंडिया ने AI-संचालित साइबर सुरक्षा में मानवीय निगरानी की आवश्यकता पर चेतावनी दी है। निवेशक अभी भी Q2 2026 की भारी गिरावट और कानूनी जांच से जूझ रही कंपनी पर नजरें जमाए हुए हैं।
AI सुरक्षा में इंसानी दखल क्यों जरूरी?
IBM इंडिया और साउथ एशिया के टेक्नोलॉजी वीपी गौरव अग्रवाल ने साइबर सुरक्षा में ऑटोनॉमस AI एजेंट्स के इस्तेमाल पर एक बड़ी चेतावनी दी है। हालांकि AI सुरक्षा संबंधी डेटा को फिल्टर करने में सक्षम है, लेकिन 'एजेंटिक AI' की तेज रफ्तार नए खतरे पैदा कर रही है। बिना सख्त गवर्नेंस के, ये सिस्टम बड़ी गलतियां कर सकते हैं, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है। भारत में डेटा ब्रीच की औसत लागत ₹255 मिलियन तक पहुंच चुकी है, ऐसे में IBM अपने watsonx.governance प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियों को ट्रैक करने और 'ह्यूमन-इन-द-लूप' सुरक्षा मॉडल अपनाने की सलाह दे रहा है।
Q2 की विफलता और कानूनी जांच का साया
निवेशकों के लिए कंपनी का हालिया ट्रैक रिकॉर्ड काफी चिंताजनक रहा है। 14 जुलाई, 2026 को पेश किए गए Q2 नतीजों में रेवेन्यू के लक्ष्य से चूकने के कारण शेयर में करीब 25% की गिरावट देखी गई। इस खराब प्रदर्शन के बाद, शेयरधारक अधिकार फर्म Hagens Berman ने कंपनी के वित्तीय खुलासों की जांच शुरू कर दी है, जिससे शेयरहोल्डर्स में अनिश्चितता का माहौल है।
नई रणनीतियां और भविष्य की राह
ग्रोथ वापस लाने के लिए IBM ने आक्रामक कदम उठाए हैं:
- अधिग्रहण: 24 सितंबर, 2026 को कंपनी ने यूके की साइबर सुरक्षा कंसल्टेंसी Logiq Consulting का अधिग्रहण किया है।
- नेतृत्व में बदलाव: 1 अक्टूबर, 2026 से Frank Baker को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या ये रणनीतिक बदलाव कंपनी के रेवेन्यू पर दबाव को कम कर पाएंगे। मुख्य चुनौती मेनफ्रेम परफॉर्मेंस को स्थिर करने और AI अनुसंधान के बढ़ते खर्चों के बीच प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की होगी।
