IBM के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी के दूसरी तिमाही के रेवेन्यू अनुमान से कम रहने के बाद स्टॉक में **23%** की बड़ी गिरावट आई। ग्राहकों के AI की ओर शिफ्ट होने से कंपनी के सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीज़न में सुस्ती देखी गई। इस खबर का असर US की बड़ी टेक कंपनियों और Infosys, Wipro जैसी भारतीय IT फर्मों के ADRs पर भी पड़ा।
IBM के शेयर क्यों गिरे?
IBM (International Business Machines Corp.) के शेयरों में 14 जुलाई 2026 को प्री-मार्केट ट्रेडिंग के दौरान 23% की जबरदस्त गिरावट देखी गई। यह गिरावट कंपनी द्वारा जारी किए गए दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद आई। कंपनी ने $17.2 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो एनालिस्ट्स के $17.86 बिलियन के अनुमान से काफी कम था। इस नतीजों ने टेक दिग्गज के लिए मुश्किल वक्त का संकेत दिया है।
टेक्नोलॉजी खर्च में बदलाव का असर
रेवेन्यू में आई इस कमी की मुख्य वजह IBM के सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में आई सुस्ती है। कंपनी ने बताया कि ग्राहक अपने बजट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर शिफ्ट कर रहे हैं। इस वजह से पारंपरिक सॉफ्टवेयर सर्विसेज की मांग कम हुई और इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीज़न की बिक्री में 7% की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के CEO अरविंद कृष्णा ने माना कि वे इन बदलते बाजार के हालात के अनुसार तेजी से कदम नहीं उठा पाए, जिसके चलते तिमाही के दौरान कई बड़े पेंडिंग डील्स भी हाथ से निकल गईं।
सेक्टर में बिकवाली और भारतीय ADRs पर असर
इस खबर पर निवेशकों की प्रतिक्रिया जोरदार रही और ग्लोबल सॉफ्टवेयर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई। यह नकारात्मक माहौल तेजी से फैला, जिससे कई बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी गिरे। ServiceNow 6.8%, Accenture 8.5%, Adobe 4.8% और Oracle 2.3% तक नीचे आ गए। इस दबाव का असर अमेरिका में लिस्टेड भारतीय टेक स्टॉक्स पर भी पड़ा। Infosys के ADRs में लगभग 9% की गिरावट आई, जबकि Wipro के ADRs न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर 3% नीचे ट्रेड कर रहे थे।
आगे की राह और निवेशक क्या देखें?
कंपनी के प्रदर्शन ने Red Hat जैसी कंपनियों के अधिग्रहण के ज़रिये हाई-ग्रोथ सॉफ्टवेयर फर्म बनने की उसकी स्ट्रेटेजिक शिफ्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि मैनेजमेंट AI का इस्तेमाल करके भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर सॉफ्टवेयर की मांग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, लेकिन हालिया नतीजों से पता चलता है कि यह बदलाव उम्मीद से ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है। निवेशक अब कंपनी के मैनेजमेंट से आगामी कमेंट्री पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि वे ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं के बीच डील क्लोजर को कैसे तेज करेंगे और रेवेन्यू ग्रोथ को कैसे स्थिर करेंगे। शेयरधारकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि कंपनी AI से जुड़े खर्चों में आई तेजी के साथ अपने इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफर्स को सफलतापूर्वक कैसे जोड़ पाती है।
