IBM India ने 'डिजिटल स्वराज' (Digital Swaraj) रणनीति पेश की है, ताकि कंपनियां डेटा और टेक्नोलॉजी पर भारत के भीतर अपना नियंत्रण बनाए रख सकें। यह कदम सख्त सरकारी नियमों और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है, जिससे अब कंपनियां पब्लिक क्लाउड की जगह हाइब्रिड और इन-हाउस डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही हैं।
IBM इंडिया ने 'डिजिटल स्वराज' या डिजिटल संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस पहल का नेतृत्व IBM इंडिया और साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप पटेल कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों को डेटा की सुरक्षा और तकनीक पर मालिकाना हक का एहसास दिलाना है।
कैसे काम करेगी यह रणनीति?
इस रणनीति का केंद्र 'Sovereign Core' सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर है। यह व्यवसायों को क्लाउड ऑपरेशंस चलाने की अनुमति तो देता है, लेकिन सिक्योरिटी कीज और कंट्रोल फंक्शन को अपने स्थानीय डेटा सेंटर्स में सुरक्षित रखने की सुविधा भी देता है। बैंकिंग और सरकारी क्षेत्र, जहां डेटा की लोकेशन को लेकर सख्त नियम हैं, वहां यह मॉडल काफी प्रभावी साबित हो सकता है।
नियमों का बढ़ता दबाव
भारत में लागू 'Digital Personal Data Protection (DPDP) Act' और RBI के डेटा लोकलाइजेशन नियमों के कारण कंपनियों पर अपने डेटा को देश की सीमाओं के भीतर रखने का दबाव है। इसी वजह से कई बड़ी कंपनियां पब्लिक क्लाउड पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के 'कैप्टिव डेटा सेंटर' (Captive Data Centers) बनाने में निवेश कर रही हैं।
नई पहल और संभावनाएं
IBM ने इसके लिए 'IBM Bharat Core' नाम से एक खास AI स्टैक भी लॉन्च किया है। साथ ही, कंपनी MeitY स्टार्टअप हब के साथ मिलकर स्थानीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को अपने ग्लोबल प्लेटफॉर्म से जोड़ रही है।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो, IT स्पेंडिंग का यह रुख अब पब्लिक क्लाउड से हटकर हाइब्रिड मॉडल की ओर शिफ्ट हो रहा है। हालांकि, अपना डेटा सेंटर बनाना और मैनेज करना महंगा और जटिल हो सकता है, लेकिन यह उन कंपनियों के लिए बड़ा अवसर है जो हाई-सिक्योरिटी और कंप्लायंस-युक्त इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करती हैं।
