IBM के सॉफ्टवेयर GM श्रीराम राघवन ने 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' कानूनों के बजाय इंडस्ट्री-स्पेसिफिक AI रेगुलेशन की वकालत की है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कंपनी अपने Q3 2026 के नतीजों (21 अक्टूबर) की तैयारी कर रही है और निवेशक भारी कर्ज के बीच कंपनी के गाइडेंस पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
IBM के सॉफ्टवेयर जनरल मैनेजर श्रीराम राघवन और IBM इंडिया के एमडी संदीप पटेल ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के रेगुलेशन को लेकर एक नया नजरिया पेश किया है। उनका मानना है कि सरकार को व्यापक कानूनों के बजाय बैंकिंग या हेल्थकेयर जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के हिसाब से नियम बनाने चाहिए। यह मॉडल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के हालिया कदमों जैसा है, जो इनोवेशन को रोके बिना जोखिम प्रबंधन का एक व्यावहारिक तरीका है।\n\nभारतीय बाजार में भी रेगुलेशन का दायरा बढ़ रहा है। NSE और BSE ने पहले ही सर्कुलर जारी कर मार्केट इंटरमीडियरीज को AI और मशीन लर्निंग सिस्टम्स के इस्तेमाल की रिपोर्ट देने को कहा है। IBM अब इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए अपने एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और AI एजेंट्स को रेगुलेटरी मानकों के अनुरूप ढालने पर जोर दे रही है।\n\n### फाइनेंशियल और मार्केट की उम्मीदें\n\nनिवेशकों की नजरें अब 21 अक्टूबर, 2026 को आने वाले Q3 नतीजों पर टिकी हैं। मार्केट एनालिस्ट्स का अनुमान है कि कंपनी का रेवेन्यू $16.82 बिलियन से $16.84 बिलियन के बीच रह सकता है, जबकि EPS (अर्निंग पर शेयर) $2.86 से $2.87 के बीच रहने की उम्मीद है। 14 अक्टूबर को IBM का शेयर $231.42 पर बंद हुआ था और हाल के महीनों में इसमें काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।\n\nसबसे बड़ी चिंता कंपनी का कर्ज है। जुलाई 2026 तक, IBM पर कुल $65.3 बिलियन का कर्ज था, जबकि कैश और शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट केवल $8.1 बिलियन थे। AI के विस्तार के लिए फंडिंग और इस बड़े कर्ज का मैनेजमेंट कंपनी के मार्जिन के लिए एक बड़ी परीक्षा है।\n\n### आगे की राह\n\nIBM का जोर 'डिजिटल सॉवरेन्टी' पर है ताकि कंपनियां बिना किसी कानूनी अड़चन के अपने डेटा और AI मॉडल सुरक्षित रख सकें। 21 अक्टूबर के अर्निंग कॉल में यह देखना अहम होगा कि मैनेजमेंट AI एजेंट्स से कमाई (Monetization) पर क्या कहता है। ऐतिहासिक रूप से IBM के नतीजों के बाद शेयर में 6% से ज्यादा की हलचल देखी गई है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह है।
