दुनिया भर के **50%** से ज्यादा होटल्स ने जेनरेटिव AI को अपनाया है, लेकिन इनमें से **10%** से भी कम को असल में कोई बड़ा फायदा मिल रहा है। यह निवेशकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि होटल कंपनियां अभी भी अपनी तकनीक पर हो रहे खर्च को मुनाफे में बदलने में जूझ रही हैं।
ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी सेक्टर फिलहाल एक बड़े डिजिटल 'बॉटलनेक' से जूझ रहा है। 'State of Distribution 2026' रिपोर्ट, जिसमें NYU, RateGain और HEDNA जैसे दिग्गजों के इनपुट्स शामिल हैं, के अनुसार हालांकि 50% से ज्यादा होटल्स ने नए AI टूल्स अपना लिए हैं, लेकिन 10% से भी कम स्टाफ को इससे काम में कोई बड़ी राहत मिली है।
मुनाफे और एफिशिएंसी का अंतर
इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा संकेत है। बड़ी होटल चेन कंपनियां डिजिटल बदलाव के नाम पर अपने टेक बजट में भारी बढ़ोतरी कर रही हैं, लेकिन अभी तक इससे ऑपरेटिंग एक्सपेंस (खर्च) में कोई खास कमी नहीं दिखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी करीब 80% कमर्शियल टीमें हफ्ते में 1 से 2 दिन सिर्फ बेसिक डेटा एनालिसिस में बिता रही हैं, जो साबित करता है कि नई तकनीक पुरानी मैनुअल प्रोसेस को खत्म नहीं कर पा रही है।
ऑटोमेशन की राह में बाधाएं
इस असफलता के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि 30% से भी कम प्रॉपर्टीज ने डेडिकेटेड ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग टूल्स में निवेश किया है। इसके अलावा, होटल के सिस्टम बिखरे हुए (Fragmented) हैं और 'डेटा साइलो' की समस्या के कारण AI सटीक नतीजे नहीं दे पा रहा है। साथ ही, मैनेजमेंट का AI पर भरोसा न होना और 'ह्यूमन-इन-द-लूप' की जिद भी ऑटोमेशन की स्पीड को रोक रही है।
निवेशकों के लिए नई रणनीति
अब कई होटल ग्रुप्स एक्सपेरिमेंट करने के बजाय मौजूदा टेक्नोलॉजी स्टैक को बेहतर बनाने पर जोर दे रहे हैं। भविष्य में निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ये कंपनियां वाकई अपने पर्सनल खर्च को कम कर पा रही हैं और रेवेन्यू मैनेजमेंट को एफिशिएंट बना रही हैं। आने वाले समय में जीत उन्हीं कंपनियों की होगी जो सिर्फ AI टूल्स नहीं लगा रहीं, बल्कि डेटा को असल प्रॉफिट ग्रोथ में बदल पा रही हैं।
