AI स्टार्टअप Highperformr.ai को इंटर्नशिप के लिए 1,290 आवेदन मिले, लेकिन किसी को भी हायर नहीं किया गया। कंपनी के फाउंडर ने बताया कि शुरुआती दिलचस्पी और असल काम करने की क्षमता के बीच बड़ा गैप है। यह घटना टेक हायरिंग में आ रही दिक्कतों और AI जॉब मार्केट में कैंडिडेट्स की बदलती प्राथमिकताओं पर रोशनी डालती है।
Detailed Coverage
चेन्नई की AI स्टार्टअप Highperformr.ai के को-फाउंडर रमेश रविशंकर ने हाल ही में एक मुश्किल हायरिंग ड्राइव के बारे में चौंकाने वाली जानकारी साझा की। कंपनी को इंटर्नशिप पदों के लिए 1,290 आवेदन मिले, लेकिन कड़े स्क्रीनिंग प्रोसेस के बाद उन्होंने किसी भी कैंडिडेट को हायर न करने का फैसला किया। इस प्रक्रिया में पता चला कि केवल 83 आवेदक ही जरूरी स्किल असेसमेंट पूरा कर पाए, और सिर्फ 10 लोग इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे, जहां सभी उम्मीदवार जरूरी मानकों पर खरे नहीं उतरे।
दिलचस्पी और काम करने की क्षमता के बीच का अंतर
फाउंडर ने बताया कि AI सेक्टर में शुरुआती दिलचस्पी तो काफी ज्यादा है, लेकिन स्टार्टअप रोल्स के लिए जरूरी कमिटमेंट के मामले में बड़ा अंतर देखने को मिला। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 94% आवेदक असेसमेंट से पहले या उसके दौरान ही इंगेजमेंट से बाहर हो गए। रविशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि कई कैंडिडेट्स ऑनलाइन AI या मशीन लर्निंग के शौकीन होने का दावा करते हैं, लेकिन शुरुआती दौर के प्रोडक्ट बनाने के लिए जरूरी रोजमर्रा की मेहनत और टेक्निकल स्किल के लिए कम ही लोग तैयार दिखते हैं।
कुछ कैंडिडेट्स ने रिलोकेशन की वजह से अप्लाई करना बंद कर दिया, जबकि अन्य ने शुरुआती आवेदन के बाद पूरी तरह से कम्युनिकेशन बंद कर दिया। इंगेजमेंट में इस तरह की गिरावट को 'फॉलो-थ्रू गैप' कहा जाता है, जहां जॉब्स के लिए अप्लाई करना आसान है, लेकिन अपनी काबिलियत साबित करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।
हायरिंग की सोच और मार्केट की चाल
इस चर्चा ने भारतीय टेक इंडस्ट्री में हायरिंग की प्रक्रियाओं पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोगों ने फाउंडर की निराशा से सहमति जताई, वहीं कुछ ने यह भी कहा कि रिक्रूटमेंट एक दो-तरफा रास्ता है। आलोचकों ने बताया कि कैंडिडेट्स को भी अक्सर कंपनियों से उसी तरह 'घोस्टिंग' (अनदेखा किया जाना) का अनुभव होता है, जहां उनके आवेदनों पर कोई जवाब नहीं मिलता, जिससे कैंडिडेट फटीग (थकान) की समस्या बढ़ सकती है। रविशंकर ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया और कहा कि असेसमेंट में समय लगाने के बाद कंपनियों को कैंडिडेट्स को फीडबैक देना चाहिए।
Highperformr.ai के लिए, हायरिंग की फिलॉसफी रिज्यूमे से ज्यादा पोटेंशियल पर केंद्रित है। कंपनी ऐसे लोगों को ढूंढने को प्राथमिकता देती है जो लगातार प्रयास करने और बिना ग्लैमर वाले, नींव के काम करने को तैयार हों। यह अप्रोच अक्सर उन स्टार्टअप्स में देखी जाती है, जिन्हें स्थापित फर्मों की तुलना में हाई-प्रेशर वाले माहौल में काम करने के इच्छुक टैलेंट ढूंढने में संघर्ष करना पड़ता है।
भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बातें
भारत में AI सेक्टर पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स और प्रोफेशनल्स के लिए यह घटना हाई इंटरेस्ट के बावजूद लगातार टैलेंट की कमी को उजागर करती है। Highperformr.ai जैसी कंपनियों के लिए भविष्य में टीम को क्वालिटी से समझौता किए बिना स्केल करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगी। जैसे-जैसे AI स्टार्टअप्स बढ़ते रहेंगे, उनकी सफलता उन लोगों को आकर्षित करने पर निर्भर करेगी जो टेक्निकल स्किल्स को ऑपरेशनल कंसिस्टेंसी के साथ संतुलित कर सकें, ताकि वे प्रोटोटाइप से स्केलेबल बिजनेस मॉडल तक पहुंच सकें। इन्वेस्टर्स अक्सर शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स में मजबूत, लीन टीमों की तलाश करते हैं, और टैलेंट जुटाने में कठिनाई एक्जीक्यूशन टाइमलाइन के लिए एक प्रैक्टिकल रिस्क फैक्टर बनी हुई है।
