Hexaware के CEO Srikrishna Ramakarthikeyan ने साफ कर दिया है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से रूटीन IT प्रोजेक्ट्स की फीस में **25%** तक की गिरावट आ सकती है। इस बदलाव से निपटने के लिए कंपनी अब फिक्स्ड-प्राइस मॉडल की ओर रुख कर रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच Hexaware Technologies ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। कंपनी के CEO Srikrishna Ramakarthikeyan का मानना है कि ऑटोमेशन के चलते सामान्य IT प्रोजेक्ट्स के लिए मिलने वाली फीस में 25% की कमी आना तय है। अब तक इंडस्ट्री 'आवरली बिलिंग' (प्रति घंटा काम) के मॉडल पर टिकी थी, लेकिन AI के दौर में यह पुराना पड़ चुका है।
नई रणनीति: फिक्स्ड-प्राइस मॉडल
इस दबाव से बचने के लिए कंपनी अब फिक्स्ड-प्राइस और प्लेटफॉर्म-आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स पर ध्यान दे रही है। इसका मतलब है कि कंपनी अब काम के घंटों के बजाय डिलीवर किए गए नतीजों (Results) के आधार पर कमाई करेगी। Hexaware का दावा है कि उनका 50% से ज्यादा रेवेन्यू पहले ही AI-इन्फ्यूज्ड सर्विसेज से आ रहा है। साथ ही, कंपनी ने 'Zerovity' नाम का एक AI डिलीवरी लेयर भी लॉन्च किया है ताकि ऑपरेशन्स को और बेहतर बनाया जा सके।
चुनौतियां और टारगेट
कंपनी ने 2029 तक $3 बिलियन रेवेन्यू का बड़ा टारगेट रखा है। हालांकि, राह आसान नहीं है। हाल ही में कंपनी ने अपने 2026 फाइनेंशियल ईयर के रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को 7.6% से घटाकर 6% से 7% के बीच कर दिया है। मैनेजमेंट का कहना है कि डील्स के पूरा होने और उनके रफ्तार पकड़ने में हो रही देरी की वजह से यह फैसला लेना पड़ा।
निवेशकों की नजरें
2025 के IPO के बाद से ही शेयर पर दबाव देखा गया है। हाल ही में 'AI Day' प्रेजेंटेशन के बाद शेयर में 6% से 8% की तेजी दिखी थी, जो निवेशकों का भरोसा लौटने का संकेत है। अब बाजार इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि क्या कंपनी अपने बड़े मार्केट ऑपर्च्युनिटीज को सही समय पर मुनाफे में बदल पाएगी और फिक्स्ड-प्राइस मॉडल को मार्जिन पर असर डाले बिना लागू कर सकेगी या नहीं।
