हरियाणा कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) पर मोटर व्हीकल टैक्स में **100%** की छूट देने का ऐलान किया है। इस पॉलिसी का मकसद राज्य में EV की बिक्री को बढ़ावा देना और ग्राहकों के लिए शुरुआती खर्च कम करना है।
EV की खरीद होगी सस्ती, ग्राहकों को बड़ी राहत
हरियाणा सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए एक नई पॉलिसी लेकर आई है। नए नियमों के तहत, ₹30 लाख तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अब कोई मोटर व्हीकल टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, ₹30 लाख से ज्यादा कीमत वाली EVs पर 50% टैक्स में राहत दी जाएगी।
EV अपनाने की रफ्तार तेज होगी?
इस फैसले से आम ग्राहकों के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदना काफी आसान हो जाएगा। रोड टैक्स का बोझ हटने से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर की कुल लागत कम हो जाएगी। ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह एक अच्छी खबर है, क्योंकि इससे हरियाणा में EV की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। ग्राहकों को यह पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों के मुकाबले ज्यादा किफ़ायती लग सकती हैं।
ऑटो सेक्टर पर क्या होगा असर?
भारत में Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसी कंपनियां फोर-व्हीलर सेगमेंट में, वहीं TVS Motor, Bajaj Auto और Ola Electric जैसी कंपनियां टू-व्हीलर सेगमेंट में अपने EV पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं। राज्य स्तरीय टैक्स छूट ग्राहकों को सीधे तौर पर आकर्षित करती है। हालाँकि, EV सेक्टर की असली ग्रोथ बैटरी टेक्नोलॉजी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लिथियम-कोबाल्ट जैसे कच्चे माल की कीमतों पर भी निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह टैक्स छूट मांग को इतना बढ़ा पाती है कि कंपनियां अपने मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को झेल सकें। अगर हरियाणा में EV निर्माताओं की बिक्री बढ़ती है, तो उनकी प्रोडक्शन कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। निवेशकों को अन्य राज्यों में भी ऐसी ही पॉलिसी पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि भारत में EV मार्केट काफी हद तक अलग-अलग राज्यों की सब्सिडी और टैक्स नीतियों से प्रभावित होता है।
