हरियाणा सरकार ने GIS-आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर इंफ्रास्ट्रक्चर साइट-फिजिबिलिटी असेसमेंट (site-feasibility assessment) का समय 45 दिनों से घटाकर महज़ 2 दिन कर दिया है। यह बदलाव PM GatiShakti नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप है, जिसका मकसद प्रोजेक्ट प्लानिंग और एग्जीक्यूशन (execution) को तेज़ करना है।
इंफ्रा प्लानिंग का बदला अंदाज: 45 दिन की जगह अब सिर्फ 2 दिन!
हरियाणा सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बना दिया है। GIS-आधारित तकनीक को अपनाने से अब साइट-फिजिबिलिटी असेसमेंट में लगने वाला 40-45 दिनों का समय घटकर सिर्फ एक से दो दिन रह गया है। यह बड़ी कामयाबी PM GatiShakti नेशनल मास्टर प्लान का हिस्सा है, जो देश भर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को कोऑर्डिनेट करने के लिए केंद्र सरकार की एक अहम पहल है।
निवेशकों और कारोबारियों के लिए बड़ी खुशखबरी!
हरियाणा में कारोबार करने वाली कंपनियों और निवेशकों के लिए यह एक बड़ा कदम है। अब फिजिबिलिटी रिपोर्ट्स (feasibility reports) तेज़ी से मिलेंगी, जिससे इंडस्ट्रियल, ट्रांसपोर्ट और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स प्लानिंग से सीधे एग्जीक्यूशन (execution) में जा सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे प्रोजेक्ट की लागत कम होगी और जटिल रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) की वजह से होने वाली देरी का खतरा भी कम होगा।
HSIIDC की अहम भूमिका
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HSIIDC) इस बदलाव में सबसे आगे है। उन्होंने इंडस्ट्रियल प्लानिंग के लिए एक खास GIS टूल तैयार किया है। यह सिस्टम अफसरों को तुरंत रोड नेटवर्क, रेल कनेक्टिविटी, पावर इंफ्रा और इरिगेशन चैनल्स (irrigation channels) का डेटा देखने की सुविधा देता है। इस एक जगह पर सारी जानकारी होने से, प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही संभावित दिक्कतों, जैसे ओवरलैपिंग यूटिलिटी लाइन्स (utility lines) या लैंड-यूज़ रिस्ट्रिक्शन्स (land-use restrictions) का पता लगाया जा सकता है। इससे साइट की बेहतर प्लानिंग होती है और कंस्ट्रक्शन के दौरान महंगे बदलावों से बचा जा सकता है।
डिजिटल स्ट्रेंथनिंग और ट्रेनिंग
इस पहल को सफल बनाने के लिए, राज्य ने अपनी इंटरनल कैपेसिटी (internal capacity) को मजबूत करने पर भी ज़ोर दिया है। हरियाणा के 720 से ज़्यादा अफसर अब PM GatiShakti पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे यह राज्य टॉप स्टेट्स में शुमार हो गया है। इसके अलावा, 200 से ज़्यादा ट्रेनिंग सेशन (training sessions) आयोजित किए गए हैं ताकि अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के स्टाफ को इन नए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल सिखाया जा सके।
आगे की राह और मॉनिटरिंग
हालांकि, यह डिजिटल कदम 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' (ease of doing business) के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन इसकी असली कामयाबी लगातार अमल पर निर्भर करेगी। एडमिनिस्ट्रेशन के लिए सबसे बड़ी चुनौती 23 अलग-अलग डिपार्टमेंट्स से आने वाले डिजिटाइज़्ड डेटा (digitized data) की सटीकता बनाए रखना होगी। निवेशकों और कारोबारियों को यह देखना होगा कि क्या फिजिबिलिटी असेसमेंट (feasibility assessment) में आई यह तेज़ी ज़मीन पर प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से मंज़ूरी दिलाने में बदल पाती है। रेवाड़ी, जींद और फरीदाबाद जैसे इलाकों में नए इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए ज़मीन के आवंटन (land allocation) और साइट अप्रूवल (site approval) की असल रफ़्तार पर नज़र रखी जाएगी, जिन्हें इस नए डिजिटल प्लानिंग फ्रेमवर्क (digital planning framework) का इस्तेमाल करके विकसित किया जा रहा है।
