Happiest Minds Technologies के शेयर में पिछले एक हफ्ते में **20%** की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह ITC Infotech के साथ हुआ मर्जर है, जिसे लेकर निवेशकों के बीच काफी कन्फ्यूजन और डर का माहौल है।
ओपन ऑफर न मिलने से निवेशक नाराज
निवेशकों की नाराजगी के पीछे सबसे बड़ा कारण इस डील का स्ट्रक्चर है। ITC Infotech प्रमोटर अशोक सोता और उनसे जुड़ी एंटिटी से 22.1% हिस्सेदारी ₹1,330 करोड़ में खरीदेगी। नियम के मुताबिक, अगर कोई कंपनी 25% से ज्यादा हिस्सेदारी खरीदती है, तो उसे पब्लिक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर लाना पड़ता है। लेकिन इस डील में हिस्सेदारी को 25% के नीचे रखा गया है, जिससे ओपन ऑफर का रास्ता बंद हो गया है। इसी वजह से रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें प्रीमियम पर एग्जिट मिलने की उम्मीद थी।
लिक्विडिटी और लिस्टिंग का इंतजार
इस मर्जर में शेयर-स्वैप का फॉर्मूला अपनाया गया है, जहां Happiest Minds के हर 81 शेयरों के बदले निवेशकों को मर्जर के बाद बनी कंपनी के 25 शेयर मिलेंगे। समस्या यह है कि नई कंपनी अभी अनलिस्टेड है और इसके शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए निवेशकों को फाइनेंशियल ईयर 2028 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। यह एक तरह का लॉक-इन पीरियड बन गया है, जिससे निवेशकों की कैपिटल फंस गई है।
इंटीग्रेशन और भविष्य की चुनौतियां
मर्जर के बाद ITC Limited की हिस्सेदारी करीब 73.4% होगी। मैनेजमेंट का कहना है कि यह कदम AI के क्षेत्र में मजबूती लाने के लिए है और किसी की नौकरी नहीं जाएगी। हालांकि, बाजार अभी भी इस बात को लेकर सतर्क है कि दो अलग-अलग वर्किंग कल्चर और मैनेजमेंट स्टाइल वाली कंपनियां एक साथ कैसे काम करेंगी। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी का इंटीग्रेशन कैसे होता है और क्या वे रेवेन्यू ग्रोथ को मेंटेन रख पाएंगे या नहीं।
