ITC Infotech के साथ मर्जर की खबर के बाद Happiest Minds Technologies के शेयर में **13%** की बड़ी गिरावट आई है। निवेशकों को कंपनी की तरफ से ओपन ऑफर न मिलने और **15 महीने** की लंबी इंटीग्रेशन प्रक्रिया को लेकर चिंता है।
बाजार की निराशा की असली वजह
निवेशकों की नाराजगी के पीछे सबसे बड़ा कारण 'ओपन ऑफर' का न होना है। रिटेल निवेशकों को उम्मीद थी कि इस विलय से उन्हें एग्जिट का मौका मिलेगा, लेकिन स्ट्रक्चर को इस तरह रखा गया है कि यह अनिवार्य ओपन ऑफर की श्रेणी में नहीं आता। इससे निवेशकों में वैल्यू रीयलाइजेशन को लेकर असमंजस है।
डील का गणित और स्ट्रक्चर
इस विलय की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में, ITC Infotech कंपनी के प्रमोटर अशोक सूटा और उनके सहयोगियों से 22.1% हिस्सेदारी लगभग ₹395 प्रति शेयर के भाव पर खरीदेगी। इसके बाद, शेयर-स्वैप एग्रीमेंट के तहत Happiest Minds के हर 81 शेयरों के बदले निवेशकों को ITC Infotech के 25 शेयर मिलेंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, ITC Limited कंपनी की प्रमोटर बन जाएगी और उसके पास लगभग 73.4% हिस्सेदारी होगी।
लंबी राह और चुनौतियां
मैनेजमेंट का तर्क है कि इस विलय से कंपनी का स्केल बढ़ेगा और अमेरिका पर निर्भरता कम होगी, जिससे कंपनी का रेवेन्यू टारगेट $1 बिलियन (FY28 तक) तक पहुंच सकेगा। हालांकि, 15 महीने की इंटीग्रेशन अवधि निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। आईटी सेक्टर में बड़ी कंपनियों के विलय के बाद टैलेंट रिटेंशन, कल्चरल बदलाव और क्लाइंट रिलेशनशिप बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है, जिसके असर से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल यह डील अभी CCI और NCLT जैसे रेगुलेटर्स की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरेगी। बाजार की नजरें अब मैनेजमेंट की कमेंट्री पर टिकी हैं कि वे इस इंटीग्रेशन और एंप्लॉयी रिटेंशन की योजना को कैसे अंजाम देंगे। तब तक के लिए सेंटीमेंट सतर्क रहने की उम्मीद है।
