HFCL के शेयरों में इस फाइनेंशियल ईयर में **232%** का उछाल आया है। यह तेजी सब्सिडियरी HTL लिमिटेड की क्रेडिट रेटिंग में बड़े अपग्रेड और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) से मिले **₹2,666 करोड़** के ऑर्डर के बाद आई है। स्टॉक **₹225.60** पर पहुंच गया, जो लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट पर बंद हुआ।
HFCL के शेयर BSE पर ₹225.60 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए, जो लगातार दूसरे कारोबारी दिन अपर सर्किट पर बंद हुए। यह प्रदर्शन इस फाइनेंशियल ईयर में शानदार रैली के बाद आया है, जिसमें स्टॉक अप्रैल 2026 से 232% बढ़ा है। अगर हम तुलना करें, तो यह ग्रोथ ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स से कहीं बेहतर है। Nifty 500 इस दौरान 14% और Nifty 50 9.3% बढ़ा है।
रेटिंग अपग्रेड से निवेशकों का भरोसा बढ़ा
हाल ही में HFCL की मैटेरियल सब्सिडियरी HTL लिमिटेड की क्रेडिट रेटिंग में हुए अपग्रेड ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। कंपनी के खुलासे के अनुसार, CARE Ratings ने HTL की ₹215 करोड़ की लॉन्ग-टर्म बैंक फैसिलिटी को 'CARE BBB+; Stable' से बढ़ाकर 'CARE A (CE); Positive' कर दिया है। इसके अलावा, ₹150 करोड़ की शॉर्ट-टर्म फैसिलिटी को 'CARE A2' तक अपग्रेड किया गया है। कंपनी ने कहा कि इन रेटिंग एक्शन से सब्सिडियरी की फाइनेंशियल प्रोफाइल में सुधार और बिजनेस फंडामेंटल्स बेहतर हुए हैं, जिससे ग्रुप को भविष्य में क्रेडिट आसानी से मिल सकता है और ब्याज लागत कम हो सकती है।
भारतनेट ऑर्डर का असर
रेटिंग अपग्रेड के अलावा, कंपनी के ऑर्डर बुक में हालिया ग्रोथ भी चर्चा का विषय रही है। जून 2026 में, HFCL को रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) से उत्तर प्रदेश (पश्चिम) टेलीकॉम सर्कल में भारतनेट फेज-III प्रोजेक्ट के लिए लगभग ₹2,666.09 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला। इस प्रोजेक्ट में टेलीकॉम इक्विपमेंट की सप्लाई और इंस्टॉलेशन के साथ-साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क बनाने का पूरा काम शामिल है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कॉन्ट्रैक्ट में वारंटी खत्म होने के बाद 10 साल की मेंटेनेंस अवधि भी शामिल है, जो लंबे समय तक रेवेन्यू का जरिया बनेगी।
बिजनेस का संदर्भ और एग्जीक्यूशन
निवेशकों के लिए, इस प्रोजेक्ट की सफलता अगले दशक में कंपनी की रिसोर्सेज को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करती है। बड़े ऑर्डर ऑर्डर बुक को मजबूत करते हैं और रेवेन्यू की विजिबिलिटी देते हैं, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए अनुशासित कैपिटल स्पेंडिंग और कुशल एग्जीक्यूशन की भी आवश्यकता होती है। निवेशकों को प्रोजेक्ट की प्रगति और वास्तविक खर्चों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि अगर लंबे समय के मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट को ठीक से मैनेज न किया जाए तो लागत बढ़ सकती है। कंपनी की फाइबर नेटवर्क ऑपरेशंस को स्केल करते हुए इन मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता आने वाली तिमाहियों के लिए एक मुख्य निगरानी बिंदु बनी रहेगी। इसके अलावा, जैसे-जैसे कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और एग्जीक्यूशन फुटप्रिंट का विस्तार करती है, उसके कुल कर्ज स्तर पर इसका असर एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा, खासकर जब टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ब्याज दरें और वर्किंग कैपिटल की जरूरतें घटती-बढ़ती रहती हैं।
