IT दिग्गज HCLTech ने ओडिशा के भुवनेश्वर में एक AI डेटा सेंटर और 5,000 कर्मचारियों की क्षमता वाला टेक हब बनाने के लिए $1.48 बिलियन (लगभग ₹12,000 करोड़) के बड़े निवेश का ऐलान किया है।
Detailed Coverage
AI इंफ्रास्ट्रक्चर में HCLTech की बड़ी छलांग!
IT सेक्टर की जानी-मानी कंपनी HCLTech ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में अपना पहला AI डेटा सेंटर और एक विशाल टेक्नोलॉजी हब स्थापित करने की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी $1.48 बिलियन (लगभग ₹12,000 करोड़) का भारी भरकम निवेश करेगी।
Sarvam AI के साथ साझेदारी
यह प्रोजेक्ट Sarvam AI नामक एक लोकल स्टार्टअप के साथ मिलकर शुरू किया जा रहा है। HCLTech ने हाल ही में इस स्टार्टअप में $150 मिलियन में 10.5% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य कंपनी की क्लाउड (Cloud) और AI (Artificial Intelligence) सर्विस को और मजबूत करना है।
2028 तक तैयार होगा टेक हब
भुवनेश्वर में बन रहे इस नए टेक्नोलॉजी कैंपस में 5,000 कर्मचारियों के बैठने की क्षमता होगी और यह 2028 तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है। यह निवेश HCLTech को बढ़ते AI इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केट में एक मजबूत दावेदार के तौर पर खड़ा करेगा।
फुल-स्टैक AI रणनीति
कंपनी के CEO, C. Vijayakumar के अनुसार, HCLTech अब 'फुल-स्टैक' मॉडल की ओर बढ़ रही है। इसमें डेटा सेंटर, AI मॉडल और फाइनल एप्लीकेशन्स का इंटीग्रेशन शामिल है। इस कदम से कंपनी सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर्स के क्लाइंट्स को खास AI सॉल्यूशंस दे पाएगी। यह पारंपरिक IT आउटसोर्सिंग से एक बड़ा बदलाव है, जहाँ मुख्य फोकस मैनपावर और मेंटेनेंस पर रहता था।
कॉम्पिटिशन और सेक्टर प्रेशर
HCLTech का यह निवेश इसे TCS जैसी अन्य बड़ी IT कंपनियों के साथ सीधे मुकाबले में खड़ा करता है, जिन्होंने हाल ही में AI डेटा सेंटर्स के लिए $2 बिलियन के निवेश की घोषणा की थी। ऐसे भारी निवेशों से कॉम्पिटिशन तो बढ़ेगा ही, साथ ही AI स्पेस में बने रहने के लिए बड़े कैपिटल की जरूरत भी साफ दिखती है। निवेशकों को भविष्य में इन भारी खर्चों का कंपनी के कैश फ्लो और प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी होगी।
ओडिशा सरकार का सहयोग
ओडिशा सरकार भी इस प्रोजेक्ट में फाइनेंशियल सपोर्ट देकर बड़े IT निवेशों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। भारत में डेटा सेंटर्स के लिए एक बेहतर लोकेशन माना जा रहा है, क्योंकि यहां ऑपरेशनल और पावर कॉस्ट पश्चिमी देशों की तुलना में कम है। हालांकि, इस सुविधा की सफलता के लिए कंपनी को स्थानीय प्रतिभा को आकर्षित करने और AI सर्विस ऑफरिंग्स को बढ़ाने की क्षमता पर निर्भर रहना होगा।
