सितंबर तिमाही में HCLTech और Tech Mahindra ने TCS से ज्यादा नियुक्तियां की हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब IT कंपनियां 'मास हायरिंग' के बजाय 'डिमांड-बेस्ड हायरिंग' और AI-संचालित उत्पादकता पर फोकस कर रही हैं।
सितंबर तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें तो HCLTech और Tech Mahindra की हायरिंग की रफ्तार TCS के मुकाबले तेज रही है। इस तिमाही में HCLTech ने 6,440 कर्मचारी जोड़े, जबकि Tech Mahindra ने 5,446 नए लोगों को टीम में शामिल किया। इसके मुकाबले दिग्गज कंपनी TCS की हायरिंग 4,258 कर्मचारियों तक ही सीमित रही। यह डेटा भारतीय IT कंपनियों की बदलती कार्यनीति की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।\n\n### बदल गई रणनीति\n\nपहले IT कंपनियां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर भर्तियां करती थीं। लेकिन अब कंपनियां 'डिमांड-ट्रिगर्ड' मॉडल अपना रही हैं। यानी अब हायरिंग तभी की जा रही है जब प्रोजेक्ट हाथ में हो। इसका मुख्य उद्देश्य लागत कम करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर काम की उत्पादकता को 100% तक बढ़ाना है। इस बदलाव से कंपनियों को फालतू के 'बेंच' (बिना काम के कर्मचारी) पर होने वाला भारी खर्च बचाने में मदद मिल रही है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?\n\nनिवेशकों के लिए यह स्थिति मिली-जुली है। अच्छी बात यह है कि कम खर्च और बेहतर कुशलता से मार्जिन (Margin) सुधरने की उम्मीद है। हालांकि, रिस्क यह है कि अगर अचानक काम का बड़ा लोड आता है, तो कंपनियों के पास तेजी से विस्तार करने के लिए लचीलापन कम हो सकता है। \n\nसाथ ही, कंपनियों की प्राथमिकता अब ऐसे इंजीनियर्स की है जो AI टूल्स में माहिर हों, ताकि एंट्री-लेवल कोडिंग और टेस्टिंग जैसे कार्यों को ऑटोमेट किया जा सके। Wipro जैसी कंपनियों ने तो कर्मचारियों की संख्या में कटौती भी की है। आने वाले दिनों में निवेशकों को कंपनियों की यूटिलाइजेशन रेट और तिमाही मार्जिन पर बारीकी से नजर रखनी होगी, ताकि यह पता चल सके कि क्या यह नई रणनीति वाकई प्रॉफिटेबिलिटी को नई ऊंचाइयों पर ले जा पा रही है या नहीं।
