HCL Technologies के COO राहुल सिंह ने साफ किया है कि AI आने से नौकरियां खत्म नहीं, बल्कि काम करने का तरीका बदल रहा है। बैंकिंग सेक्टर में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ IT कंपनियां अब 'आउटकम-बेस्ड' कॉन्ट्रैक्ट्स की ओर तेजी से बढ़ रही हैं, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
बदल रहा है सर्विस का तरीका
SBI Banking & Economics Conclave में बात करते हुए HCL Technologies के COO राहुल सिंह ने बताया कि भारतीय IT सेक्टर अब AI के एक्सपेरिमेंटल दौर से निकलकर इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में बढ़ रहा है। मुख्य बदलाव यह है कि अब कंपनियां 'मैनपावर' के बजाय 'रिजल्ट' पर जोर दे रही हैं। परंपरागत रूप से IT कंपनियां काम के घंटों (volume-based billing) के आधार पर चार्ज करती थीं, लेकिन अब वे 'आउटकम-बेस्ड' मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जहां भुगतान काम की वैल्यू यानी लोन अप्रूवल या फ्रॉड डिटेक्शन जैसे परिणामों के आधार पर होगा।
बैंकिंग सेक्टर में AI का कमाल
बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में AI का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है। OpenAI और Microsoft जैसे दिग्गजों की मदद से बैंक अब लोन प्रोसेस और क्रेडिट असेसमेंट में काफी तेजी ला रहे हैं। इससे ऑपरेशनल खर्चों में बड़ी कमी आ रही है, जो IT कंपनियों के लिए नई डिमांड पैदा कर रहा है।
AI ऑडिटर्स की बढ़ती मांग
IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामकोटी ने 'AI ऑडिटर्स' की जरूरत पर जोर दिया है, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि AI सिस्टम सुरक्षित और नैतिक दायरे में काम करें। भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी को लेकर सतर्क हैं, इसलिए वे ऑटोमेशन के साथ 'मैनुअल गार्डरेल्स' भी लगा रही हैं, ताकि क्वालिटी से कोई समझौता न हो।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या AI से होने वाली प्रोडक्टिविटी का फायदा कंपनी के मार्जिन में बदल पा रहा है या नहीं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग पर होने वाला भारी खर्च फिलहाल एक चुनौती है। लंबी अवधि में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कितनी कुशलता से इन AI प्रोजेक्ट्स को अपने पूरे क्लाइंट बेस तक पहुंचा पाती हैं।
