अमेरिका की फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने Grubhub पर गलत तरीके से ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स को धोखा देने के आरोप में **$23.8 मिलियन** का जुर्माना लगाया है। कंपनी को यह राशि ग्राहकों और ड्राइवरों को चुकानी होगी।
क्या है पूरा मामला?
FTC के अनुसार, Grubhub ने अपने बाज़ार को बढ़ाने और ड्राइवर की कमाई को गलत तरीके से पेश करने के लिए कई भ्रामक तरीके अपनाए। कंपनी ने 640,000 से ज़्यादा ग्राहकों और ड्राइवरों को इस मामले में मुआवज़ा मिलेगा।
FTC के मुख्य आरोप:
- बिना इजाज़त रेस्टोरेंट लिस्ट करना: FTC का आरोप है कि Grubhub ने कई रेस्टोरेंट्स को अपनी लिस्ट में बिना उनकी इजाज़त के शामिल किया, जिससे कंपनी को ज़्यादा ग्राहक मिलने का भ्रम पैदा हुआ।
- ड्राइवरों की कमाई को गलत दिखाना: कंपनी ने ड्राइवरों को होने वाली कमाई को लेकर गलत दावे किए, जिससे ड्राइवरों को कम आय हुई।
- फंड्स पर गलत रोक: Grubhub पर ग्राहकों के फंड्स (पैसे) तक उनकी पहुंच को गलत तरीके से रोकने का भी आरोप है।
इस सेटलमेंट के तहत, Grubhub को अब ज़्यादा पारदर्शी नियम अपनाने होंगे। इसमें रेस्टोरेंट्स को लिस्ट करने से पहले उनकी मंज़ूरी लेना और ड्राइवरों की संभावित कमाई के बारे में स्पष्ट जानकारी देना शामिल है।
भारतीय बाज़ार के लिए क्या है मायने?
हालांकि Grubhub भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड नहीं है, लेकिन फूड डिलीवरी सेक्टर में इसका बिज़नेस मॉडल और इससे जुड़ी समस्याएं भारतीय निवेशकों के लिए अहम हैं। Zomato और Swiggy जैसी भारतीय कंपनियां भी इसी सेक्टर में काम करती हैं, और उन पर भी रेगुलेटरी नियमों का पालन करने, डिलीवरी पार्टनर्स की भलाई और रेस्टोरेंट पार्टनर्स के साथ पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बना रहता है।
Grubhub को Wonder ने 2025 की शुरुआत में खरीदा था और अब यह उसकी सहायक कंपनी के तौर पर काम करती है। यह मामला दुनिया भर में गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते रेगुलेटरी फोकस का एक हिस्सा है।
फूड डिलीवरी सेक्टर के निवेशक यह भी देख रहे हैं कि क्या ये प्लेटफॉर्म्स लगातार बढ़ते हुए, सख्त उपभोक्ता संरक्षण और लेबर कानूनों के बीच टिकाऊ ग्रोथ बनाए रख सकते हैं। Grubhub का लक्ष्य 2030 तक पॉजिटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो हासिल करना है, जिसके लिए उसे अपने खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखना होगा।
