Alphabet Inc. ने अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए अब चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) को सीधे भारतीय अधिकारियों को रिपोर्ट करने का फैसला किया है। अब तक इसे अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन के जरिए रूट किया जाता था।
नई गाइडलाइन्स का असर
भारत सरकार के कड़े रुख और लगातार दबाव के बाद Google ने अपनी रिपोर्टिंग प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। सरकार का मानना था कि पहले की अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) को जानकारी मिलने में काफी देरी हो जाती थी, जिससे एक्शन लेने में बाधा आती थी। अब नई व्यवस्था से एजेंसियों को तुरंत सूचना मिल सकेगी।
क्यों दबाव में हैं Tech जायंट्स?
यह केवल Google की बात नहीं है। इससे पहले Meta Platforms Inc. ने भी इसी तरह के दबाव के चलते अपने प्रोटोकॉल में बदलाव किए थे। भारत का डिजिटल मार्केट दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, इसलिए यहां अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए इन टेक कंपनियों को लोकल रेगुलेटरी नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर नजरिए से यह बदलाव काफी अहम है। रेगुलेटरी कंप्लायंस में सख्ती का मतलब है कि इन कंपनियों को अब भारत में अपनी ऑपरेशनल टीम और रिसोर्सेज को बढ़ाना होगा, जिसका सीधा असर कंपनी के ऑपरेशनल खर्चों पर पड़ सकता है।
साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो CyberTipline ने दुनिया भर में 2.13 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध घटनाओं की रिपोर्ट की है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियों को अपने ग्लोबल बिजनेस मॉडल और स्थानीय कानूनों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये बदलाव लंबी अवधि में कंपनी के लिए ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ाते हैं या भारत में उनके कारोबार को और अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाते हैं।
