Google और Spirit Airlines डेटा डील: AI के लिए क्यों चुकाए जा रहे करोड़ों?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Google और Spirit Airlines डेटा डील: AI के लिए क्यों चुकाए जा रहे करोड़ों?

Alphabet की Google, दिवालिया हो चुकी Spirit Airlines का बिजनेस डेटा **$10 मिलियन** में खरीदने जा रही है। इस डेटा का इस्तेमाल Google अपने AI मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए करेगा। इस डील में लाखों कॉरपोरेट ईमेल और मैसेज शामिल हैं, जिसे कोर्ट की मंजूरी का इंतजार है।

Google का AI के लिए डेटा प्रेम

Alphabet की दिग्गज कंपनी Google, दिवालिया हो चुकी Spirit Airlines का भारी-भरकम बिजनेस डेटा खरीदने के लिए $10 मिलियन (लगभग ₹83 करोड़) देने को तैयार हो गई है। यह डील उस वक्त हुई है जब Spirit Airlines अपनी सेवाएं बंद कर चुकी है। Google इस डेटा का इस्तेमाल अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल को बेहतर बनाने और नए प्रोडक्ट डेवलप करने में करेगा।

डेटा में क्या-क्या है?

इस डील के तहत Google को Spirit Airlines के लगभग 10 करोड़ ईमेल, 50 करोड़ Microsoft Teams मैसेज, सॉफ्टवेयर कोड और अन्य ऑपरेशनल, मार्केटिंग व प्रोडक्टिविटी से जुड़े रिकॉर्ड मिलेंगे। AI कंपनियों के लिए इस तरह का विस्तृत डेटा बहुत कीमती होता है, क्योंकि यह उन्हें सिखाता है कि बड़ी कंपनियां कैसे आपस में बातचीत करती हैं, लॉजिस्टिक्स संभालती हैं और अपने रोजमर्रा के काम कैसे करती हैं।

डेटा का बढ़ता महत्व

यह सौदा दिखाता है कि कैसे कंपनियाँ बंद होने के बाद भी अपने डिजिटल डेटा को एक बड़ी संपत्ति के तौर पर बेच सकती हैं। पहले AI फर्म Mercor ने इसी डेटा के लिए $7.5 मिलियन की पेशकश की थी, लेकिन Google की $10 मिलियन की ऊंची बोली ने बाजी मार ली। इससे पता चलता है कि बड़ी टेक कंपनियां अपनी AI क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस तरह के खास डेटा आर्काइव खरीदने में ज्यादा पैसा खर्च करने को तैयार हैं।

प्राइवेसी और जोखिम

कंपनी ने यह भी साफ किया है कि डेटा का इस्तेमाल करने से पहले उसे डी-आइडेंटिफाई किया जाएगा, यानी उसमें से व्यक्तिगत पहचान की जानकारी हटा दी जाएगी। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट डेटा का AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल अभी भी जांच के दायरे में है। इसमें यह जोखिम बना रहता है कि कहीं कोई गोपनीय बिजनेस स्ट्रेटेजी या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी गलती से लीक न हो जाए।

आगे क्या?

इस डील को अमेरिकी बैंक करप्सी जज की मंजूरी मिलनी बाकी है, जिसके लिए 19 अगस्त 2026 को कोर्ट में सुनवाई होगी। अगर यह सौदा सफल होता है, तो यह एक मिसाल कायम कर सकता है कि भविष्य में ऐसी दिवालिया कंपनियों के डिजिटल एसेट्स का निपटान कैसे किया जाएगा। निवेशकों के लिए, यह संकेत है कि संकटग्रस्त कंपनियों के पास मौजूद जानकारी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.