Google Play की नई गाइडलाइंस: भारतीय डेवलपर्स के लिए 31 अगस्त तक KYC जरूरी, वरना बंद हो जाएगा पेमेंट!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Google Play की नई गाइडलाइंस: भारतीय डेवलपर्स के लिए 31 अगस्त तक KYC जरूरी, वरना बंद हो जाएगा पेमेंट!

भारतीय एंड्रॉयड ऐप डेवलपर्स को अब **31 अगस्त, 2026** तक अपनी KYC (Know Your Customer) वेरिफिकेशन पूरी करनी होगी, ताकि वे विदेशी ग्राहकों से पेमेंट ले सकें। RBI के नए नियमों के चलते, Google Play ने यह बड़ा कदम उठाया है। इस डेडलाइन को मिस करने वाले डेवलपर्स के ऐप्स और इन-ऐप सेल्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोका जा सकता है।

विदेशी पेमेंट के लिए KYC क्यों जरूरी?

भारतीय एंड्रॉयड ऐप डेवलपर्स के लिए एक बड़ी कंप्लायंस डेडलाइन आ गई है, जिससे उनकी अंतरराष्ट्रीय कमाई पर असर पड़ सकता है। Google Play ने अब सभी भारतीय डेवलपर्स के लिए KYC वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया है, जो विदेशी यूजर्स से पेमेंट लेते हैं। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए पेमेंट एग्रीगेटर–क्रॉस बॉर्डर (PA-CB) नियमों के तहत उठाया गया कदम है, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता लाना है।

जिन डेवलपर्स ने 31 दिसंबर, 2025 से पहले अपने ऐप्स से कमाई शुरू कर दी थी, उन्हें 31 अगस्त, 2026 तक यह वेरिफिकेशन पूरा करना होगा। अगर वे इस तारीख तक जरूरी कागजात जमा नहीं करते हैं, तो भारत के बाहर उनके ऐप्स की बिक्री रोक दी जाएगी, जिससे उनकी आय का एक बड़ा जरिया बंद हो सकता है। हालांकि, इस डेडलाइन को सितंबर के मध्य तक बढ़ाने की भी चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन फिलहाल डेवलपर्स पर तुरंत प्रक्रिया पूरी करने का दबाव है।

कंप्लायंस की राह में रुकावटें

Google ने इस वेरिफिकेशन के लिए पेमेंट एग्रीगेटर BillDesk के साथ पार्टनरशिप की है। लेकिन, डेवलपर्स ने इस प्रक्रिया में काफी देरी और दिक्कतों की शिकायत की है। जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट काफी लंबी है, जिसमें PAN डिटेल्स, कंपनी रजिस्ट्रेशन पेपर्स, टैक्स रिटर्न्स और इक्विटी व डायरेक्टर्स की जानकारी शामिल है। छोटे डेवलपर्स या इंडिविजुअल क्रिएटर्स के लिए, जिनके पास फॉर्मल बिजनेस स्ट्रक्चर नहीं है, यह एक बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव बोझ बन गया है।

यह RBI की उस बड़ी पहल का हिस्सा है जिसके तहत बाहर से भारत आने वाले पैसों को रेगुलेट किया जा रहा है। पेमेंट एग्रीगेटर्स को स्ट्रिक्ट ड्यू डिलिजेंस करने का आदेश देकर, रेगुलेटर मनी लॉन्ड्रिंग और फॉरेन एक्सचेंज नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहते हैं। ये नियम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए लंबे समय में स्थिरता लाएंगे, लेकिन फिलहाल हजारों टेक बिजनेसेज के लिए एक बड़ी बाधा बने हुए हैं।

डेवलपर्स पर पड़ने वाला वित्तीय असर

भारतीय डेवलपर इकोसिस्टम के लिए यह मामला बहुत गंभीर है। 2025 में, भारतीय ऐप पब्लिशर्स ने Google Play प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी ग्राहकों से लगभग ₹690 करोड़ कमाए थे, जो कि घरेलू बाजार से की गई कमाई से दोगुना से भी ज्यादा है। भारत के बाहर से होने वाले अरबों डाउनलोड्स को देखते हुए, पेमेंट प्रोसेसिंग में किसी भी तरह की रुकावट से अचानक कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है। बिक्री का कुछ समय के लिए रुकना भी उन डेवलपर्स के लिए नुकसानदायक हो सकता है जो सर्वर कॉस्ट, मार्केटिंग और स्टाफ सैलरी जैसी चीजों के लिए लगातार मासिक आय पर निर्भर करते हैं।

जिन डेवलपर्स ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें BillDesk द्वारा मांगे गए डॉक्यूमेंट्स को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इस मामले में सबसे बड़ा अपडेट यह होगा कि वेरिफिकेशन का स्टेटस क्या है और क्या रेगुलेटर्स अर्जियों के मौजूदा बैकलॉग को देखते हुए 31 अगस्त की समय सीमा में कोई औपचारिक एक्सटेंशन देते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.