London के Competition Appeal Tribunal में Google के खिलाफ एक क्लास-एक्शन मुकदमा शुरू हुआ है। आरोप है कि Google ने UK के यूजर्स से जरूरत से ज्यादा फीस वसूली है। लगभग **2 करोड़** कंज्यूमर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला यह दावा **£1 बिलियन** से ज्यादा के हर्जाने की मांग कर रहा है, जो **2015** से **2026** के बीच की खरीदारी से जुड़ा है।
कानूनी दांव-पेच और आरोप
लंदन के कॉम्पिटिशन अपील ट्रिब्यूनल (CAT) में यह कानूनी जंग शुरू हो चुकी है, जिसमें Google (Alphabet Inc.) को अपनी मार्केट डोमिनेंस के कारण कठघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि कंपनी ने अपने Play Store पर अनफेयर और बहुत ज्यादा कमीशन वसूला है। यह मामला 20 करोड़ से अधिक UK कंज्यूमर्स और बिजनेस की ओर से दायर किया गया है।
क्यों है इतना विवाद?
मुकदमे के अनुसार, डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 30% तक का कमीशन वसूला गया, जिससे यूजर्स के लिए कीमतें बढ़ गईं। यह दावा अक्टूबर 2015 से लेकर जुलाई 2026 तक किए गए ट्रांजैक्शंस के लिए है। वादियों का कहना है कि इन प्रैक्टिसेज ने कॉम्पिटिशन को खत्म किया और ग्राहकों पर आर्थिक बोझ डाला है।
Google का पक्ष
Google ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उनकी फीस स्ट्रक्चर ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक है और वे कॉम्पिटिटिव हैं। Google के प्रवक्ता ने सफाई दी कि Android इकोसिस्टम में यूजर्स के पास दूसरे ऐप स्टोर्स चुनने की आजादी है, इसलिए इसे मोनोपॉली कहना गलत है।
आगे क्या होगा?
यह ट्रायल ऐसे समय में हो रहा है जब बड़ी टेक कंपनियां रेगुलेटर्स की रडार पर हैं। अगस्त 2026 में ही इसी ट्रिब्यूनल ने ऐप डेवलपर्स के एक केस में £260 मिलियन के सेटलमेंट को मंजूरी दी थी, जिसमें £160 मिलियन का मुआवजा डेवलपर्स को दिया गया। हालांकि, यह नया कंज्यूमर-फोक्स्ड केस पिछले मामले से कहीं बड़ा है। अगर फैसला Google के खिलाफ जाता है, तो यह डिजिटल मार्केटप्लेस फीस के रेगुलेशन में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
