Google ने Android ऐप्स के लिए सख्त मेमोरी लिमिट लागू करने की घोषणा की है। ग्लोबल चिप शॉर्टेज के चलते अब डेवलपर्स को फरवरी 2027 तक अपने ऐप्स को ऑप्टिमाइज़ करना होगा, अन्यथा उन्हें Google Play Store पर विजिबिलिटी में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
परफॉरमेंस सुधारने की चुनौती
Google ने सभी Android डेवलपर्स के लिए सख्त गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत है। सेमीकंडक्टर कंपनियां अपना फोकस कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बजाय AI डेटा सेंटर्स पर बढ़ा रही हैं, जिससे स्मार्टफोन के लिए जरूरी हार्डवेयर की कमी हो गई है।
Android 17 के साथ Google अब ऐप्स के लिए 'पर-ऐप मेमोरी लिमिट' (per-app memory limits) लागू कर रहा है। इसका मकसद लो-एंड हैंडसेट्स पर होने वाली लैग (lag) और ऐप्स के अचानक क्रैश होने की समस्या को जड़ से खत्म करना है।
अहम डेडलाइन्स
डेवलपर्स को अब अपनी सॉफ्टवेयर ऑडिटिंग के लिए एक तय समय सीमा मिली है:
- फरवरी 2027: डायनेमिक मेमोरी और बिटमैप इस्तेमाल के लिए नए परफॉरमेंस थ्रेशोल्ड पूरे करना अनिवार्य है।
- अप्रैल 2027: गेम्स को छोड़कर सभी ऐप्स के लिए 'Zero-Tap Sign-In' और 'Android Restore Credentials API' का इस्तेमाल करना जरूरी होगा, ताकि डिवाइसेस के बीच यूजर माइग्रेशन आसान हो सके।
डेवलपर्स की बढ़ेगी मुश्किलें
जो डेवलपर्स इन नए मानकों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें Google Play Store पर सर्च विजिबिलिटी खोने या पब्लिशिंग रिस्ट्रिक्शंस झेलने पड़ सकते हैं। विशेष रूप से छोटे डेवलपर्स के लिए अपने कोडबेस को दोबारा तैयार करने का खर्चा और इंजीनियरिंग बोझ काफी बढ़ सकता है। यह पूरा घटनाक्रम सप्लाई चेन के दबाव को दर्शाता है, जहाँ अब परफॉरमेंस बनाए रखने की जिम्मेदारी हार्डवेयर के बजाय सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के कंधों पर शिफ्ट हो गई है।
