यूरोप में Google Cloud की नेटवर्किंग में आई खराबी ने डिजिटल फाइनेंस सेक्टर की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस तकनीकी समस्या के कारण fintech कंपनी Revolut की सेवाएं भी बाधित रहीं, जिससे निवेशकों के बीच कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तकनीकी खराबी का असर
Google Cloud, जो Alphabet की एक यूनिट है, ने मंगलवार को स्वीकार किया कि यूरोप में उसकी क्लाउड कनेक्टिविटी में रुक-रुक कर दिक्कतें आ रही हैं। कंपनी के ऑफिशियल स्टेटस पेज पर इस आउटेज की जानकारी दी गई, जिससे उन सभी कॉर्पोरेट क्लाइंट्स को परेशानी का सामना करना पड़ा जो अपने दैनिक ऑपरेशंस के लिए इसी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हैं।
Revolut पर क्या हुआ असर?
इसी बीच fintech दिग्गज Revolut ने भी अपने प्लेटफॉर्म पर सर्विस डिसरप्शन की रिपोर्ट दी। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर Google Cloud फेलियर को इसके पीछे का कारण नहीं बताया है, लेकिन दोनों घटनाओं के एक ही समय पर होने से यह बहस छिड़ गई है कि कैसे मॉडर्न फाइनेंशियल ऐप्स चंद बड़ी क्लाउड कंपनियों पर निर्भर हैं। किसी भी तरह का डाउनटाइम सीधे तौर पर ग्राहकों के ट्रांजैक्शन और कंपनी पर उनके भरोसे को चोट पहुंचाता है।
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
यह घटना सेंट्रलाइज्ड डिजिटल सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है। फिनटेक कंपनियां अक्सर अपना बैकएंड ऑपरेशंस पूरी तरह से थर्ड-पार्टी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर रखती हैं। जब ऐसे बड़े प्रोवाइडर्स में तकनीकी दिक्कत आती है, तो 'सिंगल पॉइंट ऑफ फेलियर' के कारण कई बिजनेस एक साथ ठप हो जाते हैं।
ग्लोबल रेगुलेटर्स अब फाइनेंशियल संस्थानों के टेक्नोलॉजी रिस्क मैनेजमेंट पर बारीक नजर रख रहे हैं। बार-बार आउटेज होने से न केवल रिपुटेशन को नुकसान होता है, बल्कि रेगुलेटरी स्क्रूटनी का खतरा भी बढ़ जाता है। अब बाजार इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि फिनटेक कंपनियां अपने सिस्टम में 'रिडंडेंसी' यानी बैकअप प्लान कैसे बनाती हैं और क्या वे भविष्य में क्लाउड प्रोवाइडर्स को डायवर्सिफाई करने की दिशा में कदम उठाएंगी।
